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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र में एक गांव ऐसा भी, जहां नहीं चलता किसी भी सरकारी,प्रशासनिक विभागीय अधिकारियों का आदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र में एक गांव ऐसा भी, जहां नहीं चलता किसी भी सरकारी,प्रशासनिक विभागीय अधिकारियों का आदेश

पूर्वांचल राज्य वाराणसी (मिर्जामुराद)

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां पर दशकों से आज तक किसी भी सरकारी प्रशासनिक अधिकारियों का आदेश का अनुपालन जमीनी स्तर पर नहीं किया गया।
दशकों से इस गांव के विकास के लिए एक परिवार संघर्ष करते आया है, इस गांव में हो रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाते आया है, फिर भी उच्च राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक संरक्षण की वजह से उसकी बातों को जहां का तहां दबा दिया गया, यह गांव मिर्जामुराद थाना क्षेत्र में बहेड़वा हाल्ट के नाम से जाना जाता है, इस गांव में 1995 से लेकर सन 2005 तक एक आदमी चंद्रभूषण मिश्रा ग्राम प्रधान के पद पर स्थापित रहा और अपने कार्यकाल के दौरान इस पूरे गांव का सर्वांगीण अपराधीकरण करने का काम किया।
इस गांव में उस ग्राम प्रधान के द्वारा कोई भी विकास कार्य को अंजाम नहीं दिया गया, उल्टे उसी ग्राम विकास के सरकारी पैसों को अपने अपराधीक गतिविधि और अपने परिवार के विकास में खर्च किया गया है, यहां तक की गांव के खड़ंजे के लिए पास किया गया ईट से अपने साढे तीन बीघे की बाउंड्री बनवाई गई, 14 विश्वा ग्राम सभा की जमीन अपने बाउंड्री में घेर लिया गया, आवाज उठाने पर अपने गांव के ही समाजसेवी अधिवक्ता जितेंद्र नाथ मिश्रा की हत्या तक कर दी गई, और अपने वर्चस्व एवं अपनी धमक बरकरार रखते हुए कुछ लोगों को अपने डर से और कुछ लोगों को अपने पैसों और चकाचौध से आकर्षित करके अपनी तरफ मिला लिया गया।
अपने पैसे और राजनीतिक संरक्षण के बल पर इस पूरे गांव में अराजकता का नंगा नाच नाचा गया।
इस पूरे गांव का अपराधीकरण करते हुए अपने गिरोह में शामिल किए हुए सदस्यों से भी सरकारी भूमि पर कब्जे तक करवा दिए गए। इस गांव का कोई भी रोड और चकरोड अपने स्थाई जगह पर नहीं है अपने प्रभाव के कारण आज तक राजस्व विभाग को इस गांव में दखल तक नहीं देने दिया गया। जबकि दिवंगत अधिवक्ता के पुत्रों के द्वारा निरंतर इन अपराधियों के खिलाफ आवाज उठाया जाता रहा है, लेकिन इनके उच्च राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक संरक्षण के आगे उस दिवंगत अधिवक्ता परिवार के आवाज को सुनने वाला कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मजबूती से आज तक सामने नहीं आया। उल्टे उस दिवंगत अधिवक्ता के पुत्रों पर ही फर्जी मुकदमे लाद दिए गए, जिसके परिणाम स्वरूप इन अपराधियों के बढ़ते मन के क्रम में इनके अपने गिरोह के सदस्यों बजरंगी गौड़ जो मिर्जामुराद थाना और वाराणसी जिले का टॉप टेन गैंगस्टर और हिस्ट्रीशीटर अपराधी है, और उसके परिवार द्वारा उस दिवंगत अधिवक्ता परिवार के भी जमीन पर कब्जा करवाते हुए, और भी अपने गिरोह के सदस्यों से गांव के सरकारी जमीन, गांव के तालाबों को पटवाते हुए उस पर अवैध निर्माण आदि तक करवा लिया गया।
लेकिन इन पर आज तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि इनके खिलाफ दिवंगत अधिवक्ता के पुत्र जिनके दो पुत्र अधिवक्ता भी हैं, आवाज उठाते रहे लेकिन कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई, कारण उच्च राजनीतिक संरक्षण एवं प्रशासनिक संरक्षण।
इस चंद्रभूषण मिश्रा एवं शिव प्रकाश मिश्रा तथा इसके परिवार के सदस्यों के द्वारा इस पूरे गांव का अपराधीकरण करते हुए इस गांव में अराजकता का नंगा नाच नाचते हुए अपने द्वारा संरक्षित हर उस गिरोह के सदस्यों को संरक्षण देते हुए आज तक सिर्फ और सिर्फ उस दिवंगत अधिवक्ता जितेंद्र नाथ मिश्रा के परिवार को उत्पीड़ित करने और करवाने का काम किया गया है, यहां तक कि उस दिवंगत अधिवक्ता की हत्या करने के बाद इन अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा हुई, गैंगस्टर एक्ट के तहत 10-10 साल की सजा हुई, लेकिन अपने पहुंच एवं अपने राजनैतिक संबंधों का फायदा उठाते हुए अपने सोर्स एवं अपने पैसों के बल पर महज 16 साल में ही सुप्रीम कोर्ट से शशर्त जमानत लेकर बाहर आ चुके हैं। गांव में ना रहते हुए भी वाराणसी और मिर्जापुर जैसे शहरों में रहते हुए गांव में अपने पाले हुए अपने गिरोह के सदस्यों के द्वारा उस दिवंगत अधिवक्ता के परिवार को उत्पीड़ित करने और करवाने का काम हर स्तर से कर रहे हैं।
इस गांव में सरकारी तालाबों को सरेआम पाट कर अवैध निर्माण कर लिया गया, सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया गया है, अपने बाउंड्री वाल के अंदर सरकारी भूमि को घेर लिया गया,गांव के बगीचे में इस चंद्रभूषण मिश्रा एवं शिव प्रकाश मिश्रा के द्वारा पोषित माफिया बजरंगी गौड़ एवं उसके गिरोह के सदस्यों के द्वारा व्यापक स्तर पर जुआ तक खिलाया जाता है इन सबके बावजूद आज तक इन अपराधियों पर कोई भी सख्त कार्रवाई संबंधित विभागीय अधिकारी के द्वारा नहीं की गई, कारण सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरक्षण।
इनका मन दिन दोगुना और रात चौगुना बढ़ते जा रहा है और इन पर नकेल कसने वाला कोई भी संबंधित अधिकारी सामने मजबूती से दिखाई नहीं दे रहा है।
ऐसी स्थिति में बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमें ये कहना पड़ रहा है, आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक गांव ऐसा भी है, जो इन अपराधियों के मकड़ जाल से उबर नहीं पाया है, जहां पर आज भी इन अपराधियों का ही कूटनीति और इनका ही वर्चस्व चलता है, जहां पर आज भी गौड़, भड़भूजा,कहार जनजातियों का भी अपने प्रभाव के कारण एसटी एससी का सर्टिफिकेट बनवा दिया जाता है, उनसे सरेआम गुंडई करवाते हुए दिवंगत अधिवक्ता के परिवार के आराजी दर्ज जमीन को कब्जा करवा दिया जाता है, और अपने जमीन पर कब्जे का विरोध करने के एवज में दिवंगत अधिवक्ता के पुत्रों पर एसटीएससी के तहत मुकदमा भी दर्ज करवा दिया जाता है, और दिवंगत अधिवक्ता परिवार के द्वारा नाना प्रकार के एप्लीकेशन और वाद विवाद के बावजूद भी इन अपराधियों पर और इनके द्वारा संरक्षित इनके गिरोह के लोगों पर कोई कार्रवाई करवा पाना कहीं से भी संभव नहीं हो पा रहा है, ऐसी स्थिति में यह बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी सन 2026 में भी हम ऐसे माहौल से और ऐसे गांव और ऐसे लोगों के बीच में अपनी जीवन जीने के लिए विवश हैं। इस गांव में राजस्व टीम का औचक निरीक्षण और बारीकी से मुयायना करना अति आवश्यक एवं न्याय संगत है, आखिर सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी के द्वारा मीडिया के सामने ही कमेंट किया जाएगा या जमीनी हकीकत भी देखने को मिलेगी।

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