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ट्रामवे इंजनों को लखनऊ रवाना करने पर स्थानीय विरोध के बावजूद रेलवे की सफलता

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज। ऐतिहासिक ट्रामवे रेल परियोजना के बंद होने के बाद लक्ष्मीपुर के एकमा डिपो में संरक्षित दो दुर्लभ इंजनों को पूर्वोत्तर रेलवे ने सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच लखनऊ ले जाकर मंडल मुख्यालय में स्थापित कर दिया। स्थानीय लोगों के भारी विरोध के कारण 17 फरवरी को रेलवे टीम को निराश होकर लौटना पड़ा था, लेकिन इस बार आरपीएफ जवानों, स्थानीय पुलिस और वनकर्मियों की फुलप्रूफ सुरक्षा व्यवस्था के साथ रेल अधिकारी सफल रहे। डिपो में शेष बचा एक इंजन ट्रैक निर्माण के बाद गोरखपुर चिड़ियाघर में स्थानांतरित किया जाएगा।सोमवार को पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ के सीनियर सेक्शन इंजीनियर अरविंद सिंह और आरपीएफ के मिथिलेश गौतम की अगुवाई में आई टीम दो भारी वाहनों पर इंजनों को लोड कर लखनऊ रवाना हुई। डिपो पहुंचते ही क्रेन की मदद से इंजनों को सावधानीपूर्वक निकाला गया और वन विभाग की कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद वाहन गंतव्य की ओर बढ़ चले। स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन की कोशिश की, लेकिन मजबूत सुरक्षा बल ने किसी अप्रिय घटना को होने से रोक लिया। एकमा डिपो में अब केवल एक इंजन बचा है, जिसे गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्लाह खान प्राणी उद्यान में रखने की योजना है।ट्रामवे का ऐतिहासिक महत्व और संरक्षण की कहानी
1924 में लक्ष्मीपुर रेलवे स्टेशन के पास जंगल से लकड़ी ढोने के लिए शुरू हुई ट्रामवे रेल परियोजना को 1982 में आर्थिक घाटे का हवाला देकर बंद कर दिया गया था। इसके बाद चार दुर्लभ इंजनों को एकमा डिपो में सुरक्षित रखा गया। इनमें से एक इंजन 2009 में लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया गया था, जबकि तीन इंजन वहीं पड़े रहे। हाल ही में प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी ने पूर्वोत्तर रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) को पत्र लिखकर दो इंजनों को लखनऊ मंडल मुख्यालय और एक को गोरखपुर चिड़ियाघर में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया। शुक्रवार को सीनियर डिविजनल मैकेनिकल इंजीनियर निलेश कुमार की टीम ने इंजनों का तकनीकी निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी, जिसके आधार पर कार्रवाई तेज हुई।शासन के 12 फरवरी के निर्देश पर यह स्थानांतरण किया गया। पूर्वोत्तर रेलवे के वरिष्ठ सहायक अभियंता अरविंद सिंह ने बताया, “ये इंजन ऐतिहासिक धरोहर हैं। लखनऊ में इन्हें बेहतर संरक्षण मिलेगा। टीम सफलतापूर्वक इंजनों को लेकर रवाना हो चुकी है।” स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये इंजन उनकी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं, इसलिए इन्हें जिले में ही रखा जाना चाहिए था। हालांकि, रेलवे का तर्क है कि डिपो में रखे रहने से इंजनों को नुकसान पहुंच रहा था।इस घटना ने महराजगंज के इतिहास प्रेमियों में चर्चा छेड़ दी है। ट्रामवे इंजनों का यह स्थानांतरण क्षेत्रीय रेल इतिहास को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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