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नन्हे वैज्ञानिकों का कमाल: विद्यालय में विज्ञान मॉडलों ने बटोरी वाहवाही

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज /घुघली

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर क्षेत्र-पनियरा अंतर्गत पूर्व माध्यमिक विद्यालय जड़ार में विज्ञान के टीएलएम (शिक्षण-अधिगम सामग्री) मॉडलों की भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सभी कक्षाओं के उत्साही और खोजी प्रवृत्ति के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने नवाचारी मॉडलों से सभी को प्रभावित किया।
प्रदर्शनी में बच्चों द्वारा बनाया गया पेरिस्कोप विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यह मॉडल पूरी तरह क्रियाशील था और छात्रों ने उसके निर्माण की प्रक्रिया व उपयोगिता को सरल भाषा में समझाया। कई छात्र-छात्राएं चार्ट पेपर और मॉडलों के माध्यम से आमजन को वैज्ञानिक सिद्धांतों की जानकारी दे रहे थे।
कार्यक्रम में एक छात्र द्वारा तैयार किया गया “नो कॉस्ट–लो कॉस्ट” यंत्र भी चर्चा में रहा। शीशे की बोतल और लोहे के नट से निर्मित इस उपकरण का उद्देश्य जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा करना है। विद्यार्थियों ने बताया कि यह साधारण लेकिन प्रभावी यंत्र किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है और छुट्टा जानवरों से फसल बचाने में सहायक होगा।
कुछ विद्यार्थियों ने सूक्ष्मदर्शी के माध्यम से स्लाइड का प्रदर्शन कर सूक्ष्म जगत की अद्भुत दुनिया से अवगत कराया। विद्यालय के विज्ञान शिक्षक राहुल कुमार पटेल ने सभी स्टालों का अवलोकन कर बच्चों से उनके प्रोजेक्ट की जानकारी ली और स्टाल पर लगे म्यूजियम स्पेसिमेन के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित व प्रेरित करना तथा जनसाधारण को वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति जागरूक बनाना रहा। वक्ताओं ने कहा कि विज्ञान के बिना विकास की गति संभव नहीं है और वैज्ञानिक सोच से ही अंधविश्वास व गलत धारणाओं का खंडन किया जा सकता है।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार पटेल, आशुतोष पटेल, संदीप कुमार शर्मा, बबिता साहनी, विद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्ष सरिता देवी, ग्राम प्रधान ढुनमुन प्रसाद एवं गांव के कई सम्मानित लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
विद्यालय परिसर में पूरे दिन उत्साह, जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच का वातावरण देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण अंचल के बच्चे भी अवसर मिलने पर विज्ञान के क्षेत्र में नई उड़ान भर सकते हैं। 

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