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नईकोट रेलवे स्टेशन: सैकड़ों यात्री परेशान, मूलभूत सुविधाएं शून्य

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में गिने जाने वाले नईकोट रेलवे स्टेशन पर रोजाना सैकड़ों यात्री आते‑जाते हैं, लेकिन स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं का बुरा हाल है। यहां पानी की टोंटी काम नहीं करती, शौचालय गंदगी से भरा है और स्टेशन पर लगा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी पुराना व फटा‑पुरानी हालत में लटक रहा है। यात्रियों और स्थानीय निवासियों ने इसे रेल प्रशासन की उदासीनता की छवि बताते हुए मांग की है कि इस स्टेशन पर तुरंत सुधार कार्य किया जाए।सैकड़ों यात्रियों को झेलनी पड़ रही परेशानीस्थानीय यात्रियों ने बताया कि नईकोट रेलवे स्टेशन महराजगंज शहर से जुड़ने वाला एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है, जहां रोजाना सैकड़ों लोग ट्रेनों से चढ़ते‑उतरते हैं। इनमें ग्रामीण इलाकों से आने वाले व्यापारी, विद्यार्थी, छात्र‑छात्राएं और शहरों की तरफ रोजगार की तलाश में जाने वाले युवा शामिल हैं। लेकिन स्टेशन पर जगह‑जगह दिखने वाली गंदगी, टूटी‑फूटी बेंच और जर्जर तिरंगे को देखकर यात्रियों में निराशा व्याप्त है। एक यात्री रामलाल ने कहा, “हम सुबह‑शाम दोनों समय यहां आते हैं, लेकिन पानी तक नहीं मिलता। गर्मियों में तो हालत और भी खराब हो जाती है।”पेयजल और शौचालय का बुरा हालस्टेशन पर लगी पानी की टोंटियां पुरानी पड़ चुकी हैं और कई जगह से टूटी हुई हैं। यात्रियों को भीड़ के बीच बोतल वाला पानी लेना पड़ता है, जो हर व्यक्ति के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ता है। शौचालय की हालत और भी चिंताजनक है। यहां साफ‑सफाई का प्रबंध न होने से फर्श फिसलन भरा और दुर्गंध से भरा रहता है। यात्रियों का कहना है कि कई बार इतनी गंदगी में जाने से बचने के लिए वे ट्रेन तक रुके रहते हैं। एक अन्य यात्री सुरेश कुमार ने कहा, “कितना दिन खुले में जाकर शौच करना पड़ेगा? रेलवे को इस तरफ तुरंत ध्यान देना चाहिए।”जर्जर तिरंगा और स्टेशन की दुर्दशास्टेशन प्रवेश द्वार पर लगी रेलवे स्टेशन की तस्वीरें भी पुरानी हैं और कई जगह से टूटी हुई हैं। सबसे ज्यादा उल्लासनीय बात यह है कि स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक तिरंगा झंडा भी फटा‑फटा और धूल से भरा हुआ है। ऐसे में राष्ट्रभावना को भी ठेस पहुंचती है। स्थानीय निवासी रामप्रकाश ने कहा, “तिरंगा हमारी शान और गरिमा है। इसे इस हाल में लटकाना राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है। रेलवे प्रशासन को इसे तुरंत नए से लगाना चाहिए और स्टेशन की साफ‑सफाई करानी चाहिए।”युवाओं की विशेष दिक्कतेंयहां से गुजरने वाले युवा यात्रियों, खासकर छात्र‑छात्राओं और नौकरी की तलाश में जाने वाले युवाओं का कहना है कि स्टेशन पर न तो उन्हें ठीक से बैठने के लिए स्थान मिलता है और न ही स्टडी करने या रिवीजन करने का वातावरण। धूप और गंदगी के बीच बैठकर उन्हें ट्रेन की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। युवती सुनीता ने बताया, “हम महिलाएं अकेले भी यात्रा करती हैं, लेकिन यहां साफ शौचालय और पीने का साफ पानी न होने से ट्रिप पहले से ही तनाव और तकलीफ से भरी हो जाती है।”रेल प्रशासन से यात्रियों की मांगस्थानीय यात्रियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि नईकोट रेलवे स्टेशन पर कम से कम निम्न सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएं:टूटी टोंटियों को ठीक कर नियमित पेयजल व्यवस्था,अलग‑अलग पुरुष व महिला शौचालय और उनकी नियमित साफ‑सफाई,टूटी बेंचों की मरम्मत या नए बरामदे व बैठक कक्ष का निर्माण,राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को नए से लगाना और स्टेशन परिसर की साफ‑सफाई कराना।यात्रियों का मानना है कि जब स्टेशन पर सैकड़ों यात्री रोज मेहनत से ट्रेन में बैठकर अपना रोजगार और पढ़ाई जुटाने जाते हैं, तो रेलवे को उनकी इस यात्रा को सुरक्षित और सुखद बनाने का नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने जिला रेल प्रशासन से अपील की है कि नईकोट रेलवे स्टेशन को “न्यूनतम सुविधा वाला स्टेशन” घोषित न करें, बल्कि इसे हर यात्री विशेषकर युवाओं के अनुकूल बनाने के लिए तत्काल योजना बनाएं। 

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