(अमर विश्वकर्मा)
धर्म और आस्था की नगर वाराणसी में स्थित श्री काल भैरव मंदिर में प्रतिवर्ष होने वाला काल भैरव बाबा का वार्षिक श्रृंगार भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन अवसर होता है। इस दिन मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
हिंदू धर्मग्रंथों में काल भैरव को बाबा विश्वनाथ का रौद्र स्वरूप तथा काशी का कोतवाल माना जाता है। मान्यता है कि काशी में प्रवेश करने वाले हर भक्त को पहले काल भैरव बाबा की अनुमति प्राप्त करनी होती है। यही कारण है कि वार्षिक श्रृंगार के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ता है।
इस विशेष दिन पर बाबा का भव्य श्रृंगार किया जाता है। सुगंधित पुष्पों, आकर्षक वस्त्रों, चांदी-सोने के आभूषणों और चंदन से बाबा की प्रतिमा को सजाया जाता है। मंदिर के पुजारी विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर बाबा को भोग अर्पित करते हैं। घंटों और शंखों की ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। श्रद्धालु कतारों में खड़े होकर बाबा के दर्शन करते हैं और अपने जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
वार्षिक श्रृंगार के अवसर पर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को भी विशेष रूप से सजाया जाता है। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन द्वारा भी व्यापक इंतजाम किए जाते हैं ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है।
कल होने वाले वार्षिक उत्सव के बारे मेंपुनीत उपाध्याय (महंत कालभैरव मंदिर काशी) ने बताया की काल भैरव बाबा का यह वार्षिक श्रृंगार केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि काशी की जीवंत आध्यात्मिक परंपरा और आस्था का प्रतीक भी है। यह आयोजन हर वर्ष श्रद्धालुओं को यह संदेश देता है कि भक्ति, विश्वास और संस्कृति की यह धारा अनादि काल से प्रवाहित होती आ रही है और आगे भी यूँ ही चलती रहेगी।










