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डॉ घनश्याम सिंह पीजी कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ

विकसित भारत 2047 बनाने के लिये भारत सरकार नितिगत फैसले लेकर कार्य कर रही-प्रो. आनंद त्यागी

वाराणसी। भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद के सहयोग से डॉ घनश्याम सिंह पीजी कॉलेज सोयेपुर लालपुर के भूगोल विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन का शुभारम्भ सोमवार किया गया।
पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और प्रोद्योगिकी: विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ने की राह विषयक संगोष्ठी का उद्धघाटन महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी एवं पूर्व कुलपति एवं शेपा के निदेशक प्रो. पृथ्वीश नाग विशेष आमंत्रित अतिथि इंस्टिट्यूट ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेस बीएचयू के निदेशक प्रो. यूपी सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. वीएस नेगी, दिल्ली विश्वविद्यालय सेंटर ऑफ़ हिमालयन स्टडीज के निदेशक प्रो. विंध्यवासिनी पाण्डेय ने माँ सरस्वती व स्व. डॉ. घनश्याम सिंह के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया। छात्र छात्राओं ने मंगलाचरण एवं स्वागतगान की प्रस्तुति दी।
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि, महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत प्राकृतिक रूप से संपन्न देश है और हिमालय इसका मुख्य कारण है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसका समाधान निकाला जाना चाहिए इस संगोष्ठी का मूलभूत उद्देश्य यही है। विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय युवाओं का है और किसी भी देश की उत्पादन क्षमता युवाओं पर निर्भर करती है। अतः इसके अनुसार नियम बनाने की आवश्यकता है साथ ही उन्होंने कहा कि ज्ञान आधारित समाज का निर्माण किया जाना चाहिए क्योंकि ज्ञान ही अर्थव्यवस्था का आधार है। उन्होंने संगोष्ठी के विषय पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और प्रोद्योगिकी आधारित प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि सरकार इन सभी चारों विषयों को एक साथ समाहित करने के लिये नीतिगत कार्य कर रही है। सामाजिक सुधार, अंवेषण, शिक्षा सुधार एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के क्षेत्र में सरकार कार्य तेजी से किया जा रहा है। अब हमारा हिंदुस्तान 2050 तक तेजी से बुढ़ा होने की ओर अग्रसर है। उत्पादकता में कमी होने लगेगी इसलिए अब नवयुवकों के लिये आगे आने वाले 25 साल बहुत महत्वपूर्ण है।
डॉ. पृथ्वीश नाग, पूर्व कुलपति, महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ ने संधारणीय विकास लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि स्वयं को इन लक्ष्यों के अनुसार ढालने की आवश्यकता है साथ उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन को सकारात्मक दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए। यह नये तरीके से काम करने के लिए एक नया अवसर भी है।
इसी क्रम में मुख्य वक्ता प्रोफेसर विन्ध्यवासिनी पांडेय ने कहा कि वैश्विक तापवृद्धि जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण है। उन्होंने वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता जताते हुए कहा कि आने वाले समय में हिमालय के ऊपर ब्लैक कार्बन इकठ्ठा होगा और ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनेगा।
प्रोफेसर वी. एस. नेगी ने कहा कि शिक्षा जगत चुनौतीओ भरा क्षेत्र है। यहाँ होने वाला छोटे से छोटा बदलाव जीवन को प्रभावित करता है। शिक्षण संस्थान अपनी भूमिका का गंभीरता से निर्वाचन करे क्योंकि नवयुवा ही विकसित भारत की नींव हैं।
प्रोफेसर यू.पी. सिंह ने कहा कि हमें आत्ममंथन करने की आवश्यकता है ताकि हमारा पर्यावरण व संस्कृति सुरक्षित रहे।
डीएवी कॉलेज के अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो अनूप कुमार मिश्रा ने कहा कि हमारे हमें विकसित भारत के निर्माण के लिये तकनीक का इस्तेमाल ऐसा करना है कि पर्यावरण और अपनी सभ्यता संस्कृति बची रहें और विकास का इंजन आगे बढ़ता रहें।
महाविद्यालय के प्रशासक संजीव सिंह ने समस्त अतिथियों को अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर संगोष्ठी सारांशिका का विमोचन भी किया गया। संगोष्ठी के प्रथम सत्र में कुल 50 से अधिक शोध पत्र पढ़े गए।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रबंधक नागेश्वर सिंह व विषय प्रवर्तन प्राचार्य डॉ आनंद सिंह संचालन डॉ विपुल कुमार शुक्ला एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ रचना पाण्डेय ने दिया।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार बीएचयू अरुण कुमार सिंह, प्रो. एएस रघुवंशी, डॉ जगवीर सिंह राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के डॉ जगदीश सिंह दीक्षित, डॉ विनोद सिंह, डॉ तारकेश्वर सिंह, डॉ हौसिला प्रसाद सिंह, डॉ सुनील कुमार मिश्रा, नई दिल्ली से आये शोध छात्राएँ सारांश, अनु प्रिया, होनीया डाकपे, सूरज देव सहित देश के विभिन्न भागों से आये 350 छात्र शोधार्थी एवं शिक्षक शामिल रहें।

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