उत्तर प्रदेश में रसोई गैस का संकट लगातार 9वें दिन भी जारी है, जिससे आम लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। कई जिलों में लोग घंटों नहीं, बल्कि कई किलोमीटर दूर जाकर गैस सिलेंडर के लिए लाइन में लगने को मजबूर हैं।
📌 बाराबंकी से तस्वीर चिंताजनक
बाराबंकी में एक व्यक्ति 8 किलोमीटर पैदल चलकर गैस एजेंसी पहुंचा। वह आधी रात को ही घर से निकल पड़ा और तड़के 3 बजे से लाइन में लग गया, ताकि किसी तरह सिलेंडर मिल सके।
परिवार की स्थिति बेहद गंभीर है—पिता कैंसर से पीड़ित हैं, मां ब्रेन हेमरेज के बाद अस्वस्थ हैं, ऐसे में गैस की किल्लत ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
📌 देवरिया में दिव्यांग को निराशा
देवरिया में एक दिव्यांग व्यक्ति गैस लेने पहुंचा, लेकिन उसे खाली हाथ लौटना पड़ा। एजेंसी ने साफ कहा कि 12 मार्च तक की बुकिंग वालों को ही सिलेंडर मिल रहे हैं, जबकि उसने 14 मार्च को बुकिंग कराई थी।
📌 लखीमपुर खीरी में विरोध प्रदर्शन
लखीमपुर खीरी में सपा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सिर पर गैस सिलेंडर रखकर और गले में लकड़ी-कंडों की माला पहनकर विरोध जताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि गैस के बढ़ते दामों और किल्लत ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है।
⚠️ जनता की परेशानी बढ़ी
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गैस की कमी के चलते लोग फिर से चूल्हे और लकड़ी पर खाना बनाने को मजबूर
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लंबी लाइनों और देरी से वितरण से बढ़ रही नाराजगी
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जरूरतमंद और बीमार परिवारों पर सबसे ज्यादा असर
🗣️ बड़ा सवाल
क्या जल्द खत्म होगा यह गैस संकट?
क्या सरकार और एजेंसियां इस समस्या का त्वरित समाधान निकाल पाएंगी?
📢 निष्कर्ष
गैस सिलेंडर की किल्लत अब सिर्फ सप्लाई का मुद्दा नहीं रही, बल्कि यह आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी और जरूरतों से जुड़ा बड़ा संकट बन चुकी है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।










