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वाराणसी कोर्ट में SHO का विवादित व्यवहार, अभियोजन अधिकारी ने DCP से की कार्रवाई की मांग

वाराणसी के न्यायालय परिसर में शिष्टाचार और पदानुक्रम को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। चौबेपुर थाने के प्रभारी निरीक्षक (SHO) वीरेंद्र कुमार सोनकर एक बार फिर अपने व्यवहार को लेकर चर्चा में हैं। इस बार मामला सीधे कोर्ट परिसर से जुड़ा है, जहां उन पर अभियोजन अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा है।

अभियोजन अधिकारी अंकित कुमार सिंह ने इस संबंध में डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार को लिखित शिकायत देकर SHO के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में SHO के व्यवहार को न केवल अमर्यादित बताया गया है, बल्कि इसे न्यायिक गरिमा के खिलाफ भी माना गया है।

क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के अनुसार, 7 मार्च 2026 को वाराणसी कोर्ट के एसीजेएम न्यायालय-06 में कार्यरत अभियोजन अधिकारी अंकित कुमार सिंह अपने निर्धारित स्थान पर बैठकर अभियोजन से संबंधित पत्रावलियों का अध्ययन कर रहे थे। इसी दौरान चौबेपुर थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार सोनकर न्यायालय कक्ष में पहुंचे।

शिकायत के मुताबिक, SHO सीधे अभियोजन अधिकारी की कुर्सी के पास पहुंचे और बिना किसी औपचारिक अभिवादन के बातचीत शुरू कर दी। आरोप है कि उन्होंने न तो “जय हिन्द” कहा और न ही किसी प्रकार का सम्मानजनक संबोधन किया।

पद और प्रोटोकॉल का मुद्दा

अभियोजन अधिकारी ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया कि वे 5400 ग्रेड पे के अधिकारी हैं, जबकि SHO 4600 ग्रेड पे पर नियुक्त हैं। इस आधार पर उन्होंने अपेक्षा जताई कि SHO को शासकीय परंपरा के अनुसार वरिष्ठ अधिकारी का अभिवादन करना चाहिए था।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वयं वे जब किसी वरिष्ठ अधिकारी से मिलते हैं, तो पूर्ण शिष्टाचार और सम्मान का पालन करते हैं, लेकिन इस मामले में SHO का व्यवहार “पीड़ादायक और खेदजनक” रहा।

DGC और न्यायिक अधिकारियों को भी दी गई जानकारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियोजन अधिकारी ने न केवल डीसीपी को अवगत कराया, बल्कि जिला शासकीय अधिवक्ता (DGC) और अन्य न्यायिक अधिकारियों को भी पूरी घटना की जानकारी दी है।

इस घटना के बाद अधिवक्ताओं में भी नाराजगी देखी जा रही है। वकीलों का कहना है कि कोर्ट परिसर में इस प्रकार का व्यवहार न्यायिक गरिमा को ठेस पहुंचाता है।

पहले भी विवादों में रहे हैं SHO

बताया जा रहा है कि इंस्पेक्टर वीरेंद्र सोनकर पहले भी अपने कार्यशैली और व्यवहार को लेकर चर्चा में रहे हैं। विभिन्न थानों में तैनाती के दौरान उनके खिलाफ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं।

अब क्या होगा आगे?

अब निगाहें डीसीपी वरुणा के निर्णय पर टिकी हैं। शिकायत के आधार पर जांच और संभावित कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो SHO पर विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।

यह मामला केवल एक अभिवादन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन, पद की गरिमा का है। कोर्ट परिसर में इस तरह की घटनाएं व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।

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