पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी
वाराणसी दशाश्वमेध घाट मार्ग स्थित प्राचीन कामरूप मठ में चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन विधि विधान से देवी का पूजन अर्चन किया गया
मौके पर मठ के महंत स्वामी शुद्धानंद तीर्थ महाराज ने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाली यह नवरात्रि नव संवत्सर का भी आरंभ मानी जाती है। इसी दिन से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भक्तजन नौ दिनों तक माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की उपासना करते हैं।
नवरात्रि की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर होने वाली घटस्थापना यानी कलश स्थापना से होती है. इसे नवरात्रि पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और अखंड ज्योति जलाकर नौ दिनों तक पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि सही मुहूर्त में घटस्थापना करने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.










