पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय, गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ रंजना मल्ल ने बताया कि चैत्र नवरात्रि एक पवित्र पर्व है, जिसमें लोग व्रत रखकर माँ दुर्गा की विभिन्न रूपों की आराधना करते हैं। इन नौ दिनों में खान-पान का विशेष महत्व होता है। क्योंकि यह केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि शरीर और मन की शुद्धि से भी संबंधित है। व्रत में सही आहार अपनाने से व्यक्ति स्वस्थ और ऊर्जा बनी रहती है। व्रत का पालन सहज रूप से हो पाता है। इसलिए नवरात्रि के दौरान हमेशा सात्त्विक भोजन ही करना चाहिए, सात्त्विक भोजन हल्का, पचने में आसान और शुद्ध होता है। इसमें फल, दूध, दही, पनीर, मखाना, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े का आटा शामिल होते हैं। व्रत के दौरान यह ध्यान रखना चाहिए कि शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहें, केवल एक ही प्रकार का भोजन लेने से कमजोरी हो सकती है।आहार में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का संतुलन होना चाहिए, जैसे साबूदाना और आलू से ऊर्जा, दूध और पनीर से प्रोटीन ,फल से विटामिन और मिनरल्स मिलता है । इस प्रकार संतुलित भोजन लेने से शरीर स्वस्थ और सक्रिय रहता है । नवरात्रि में ज्यादातर लोग कुट्टू की पूड़ी, पकौड़ी या तले हुए खाद्य पदार्थ अधिक मात्रा में खाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। अधिक तेल और घी से बने भोजन से पाचन संबंधी समस्याएं जैसे गैस, अपच और एसिडिटी हो सकती हैं, इसलिए जितना संभव हो, उबला, भुना या हल्का पका हुआ भोजन ही लेना चाहिए। व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है।नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और मौसमी फलों का रस भी लिया जा सकता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और ऊर्जा बनाए रखता है। फल और तरल पदार्थ व्रत के दौरान बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, ये शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन को भी बेहतर बनाते हैं। फल जैसे सेब, केला, अनार, पपीता और संतरा आसानी से पच जाते हैं और शरीर को आवश्यक पोषण देते हैं। चाय और कॉफी का अधिक मात्रा में सेवन करने से डिहाइड्रेशन और एसिडिटी हो सकती है, इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए और इसके स्थान पर हर्बल ड्रिंक या दूध लेना बेहतर होता है। हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है, यदि किसी को मधुमेह, उच्च रक्तचाप या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं तो उन्हें अपने आहार में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना भी उचित होता है ताकि व्रत के दौरान कोई स्वास्थ्य समस्या न हो। नवरात्रि में मखाने की खीर, साबूदाना खीर और मिठाइयों का सेवन अधिक किया जाता है लेकिन अधिक मीठा खाने से वजन बढ़ सकता है और ब्लड शुगर भी बढ़ सकता है, इसलिए मीठे का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। उपवास का सही तरीका अपनाएं। व्रत का मतलब पूरी तरह भूखा रहना नहीं है, बल्कि नियंत्रित और संतुलित भोजन करना है । चैत्र नवरात्रि के दौरान भोजन पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है, क्योंकि यह स्वास्थ्य और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। सही खान-पान अपनाने से शरीर स्वस्थ रहता है, ऊर्जा बनी रहती है और मन शांत रहता है। सात्त्विक, संतुलित और स्वच्छ भोजन न केवल व्रत को सफल बनाता है, बल्कि जीवन में अनुशासन और सकारात्मकता भी लाता है। यदि इन बातों का सही ढंग से पालन किया जाए, तो नवरात्रि का पर्व न केवल धार्मिक, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
व्रत मे खान-पान पर रखे विशेष ध्यान: डॉ रंजना मल्ल










