पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी
हनुमान घाट स्थित श्री पंचनाम जूना अखाड़ा के अंतर्गत अत्यंत प्राचीन बड़े हनुमान मंदिर में बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को भव्य धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 251 ब्राह्मणों द्वारा सामूहिक रूप से सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा का विशेष पाठ किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान 251 ब्राह्मणों ने एक साथ स्वरबद्ध ढंग से 1100 सुंदरकांड तथा 1100 हनुमान चालीसा का पाठ किया। वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भी पूरे आयोजन में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। आयोजन के दौरान 11,000 गुलाब पुष्पों से भगवान हनुमान का षोडशोपचार विधि से पूजन-अर्चन संपन्न कराया गया। फूलों से सुसज्जित मंदिर परिसर की छटा अत्यंत आकर्षक रही और भक्तों ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
यह भव्य आयोजन श्रीमंहत हरि गिरी जी महाराज की प्रेरणा से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज तथा महामंडलेश्वर रूपोंमयी नंदगिरि माता जी (काशी पीठाधीश्वर, वीरेश्वर मठ, श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा) का सानिध्य प्राप्त हुआ। उनके आशीर्वचन से श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक उत्साह का संचार हुआ।
मौके पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को एकता एवं सद्भाव का मार्ग दिखाते हैं।अनुष्ठान के दौरान राष्ट्र की एकता, अखंडता और आपसी सौहार्दपूर्ण वातावरण की कामना की गई। संतों और विद्वान ब्राह्मणों ने देश के सुचारू संचालन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय उन्नति के लिए विशेष प्रार्थना की। इसके साथ ही भारतीय सैन्य शक्तियों के विकास, देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए भी हनुमान जी से आशीर्वाद मांगा गया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासित व्यवस्था देखने को मिली। मंदिर समिति एवं स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं के लिए सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि
मौके पर कार्यक्रम संयोजक मुकेश सिंह ने बताया कि इतने बड़े स्तर पर सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ अत्यंत प्रेरणादायक है। इस प्रकार के धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में सकारात्मकता और राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत किया जा सके।










