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सिस्टम से टकराने वाला टूट कर बिखर जाता है

कृष्णा पंडित की कलम से

नुमाइश और नकली लोगों की चमकती दुकान,गरीब की टूटी मकान, भारत की यही है सच्ची पहचान

बंद करो फर्जी संविधान का हवाला देकर लाचार कानून की दुहाई देना बदहाल व्यवस्था,आम जनमानस आज रो रहा है और नौकरशाह के कदमों में बैठा है..

घिसी पीटी कानून व्यवस्था की देन है कि सड़क पर एक लाचार को सरेआम पीटा जाता है और फिर कानून का हवाला देकर उसको सलाखों के पीछे धकेल दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ जन सेवक और नौकरशाहों को घंटों यातायात बाधित कर उनके लिए व्यवस्था का इंतजाम किया जाता है, नकली व्यवस्था से लोगों की खून पसीना टैक्स के रूप में वसूला जा रहा है जो किसी कत्ल से काम नहीं और व्यवस्था के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति के लिए अस्पताल और विद्यालय से लेकर सरकारी संसाधन जिन पर हक, हुकूक वालों का ही चलता है !

नीति और नियत का सवाल है झूठ और जुमले की घुसपैठ सभी सरकारों में होती रही है और लोग गिद्ध की नजर से आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हुए अपराध से गहरी रिश्ता रखने वाले का बोलबाला है !
पढ़ा लिखा आदमी आज उपवास का पात्र है और तो और नकली और तलवे चाटने वाले लोग सभी बाजार में अपनी चमक बनाए हुए दुकानदारी कर रहे हैं जहां सौदा व्यक्ति के ईमान धर्म और भ्रष्टाचार का होता है जिसकी जिम्मेदार सिर्फ कोई एक नहीं बल्कि पूरा सिस्टम ही धोखा है ! न्याय व्यवस्था तो सिर्फ मात्र एक मंत्र और कहानी बनकर भारत में गली गांव से लेकर शहर तक विचरण के लिए स्थापित किया गया है जबकि इसकी मूल में कोई भी सहूलियत और आम जनमानस की भविष्य का उसके जीवन यापन में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है ! दर्द बढ़ाकर बांटने वाले हिमायती सफेद पोस नेता सिर्फ सामाजिक सेवक बन समय का भरपूर फायदा उठाते हैं और दबे कुचले लोगों को अपना शिकार बनाते हैं ! अक्सर देखा जाता है कि चाहे थाना स्तर पर किसी शहर जिले में घटित घटना हो या राज्य ज्यादातर सरकारी व्यवस्थाओं का भेट चढ़ जाता है, आज भी भारत में अपराधियों को संरक्षण व्यवस्था में बैठे लोगों द्वारा चाहे वह राजनीति के चेहरे हो या वर्दी के सपोले उन्हीं की व्यवस्था और मनसे सब संचालित होता है ! दर्जनो नहीं सैकड़ो नहीं बल्कि हजारों अपराधियों की एक टोली विधानसभा से लेकर संसद भवन में अपनी उपस्थिति के साथ भारत की दिशा और दशा बदल रहा है ! एक पढ़ा लिखा युवक नौजवान जिसके पास प्रतिभा है लेकिन संसाधन और आर्थिक अभाव के कारण वह पूरा जीवन दूसरे की गुलामी और अपनी भरण पोषण के साथ परिवार की जीवकोपार्जन में लगा रहता है !
भारत के इतिहास में आप देख लीजिए किसी भी नेता अभिनेता और राजनीति के धुरंधरों के महल और उनकी शान शौकत विरासत के रूप में बच्चों का भविष्य देश से लेकर विदेश तक संभाले हुए हैं वहीं एक आम नागरिक जो खेत खलिहान में लोगों की जीवन के लिए संघर्ष कर अपना भविष्य सिर्फ पन्नों पर तलाश रहा है !जबकि मसीहा और उसकी व्यवस्था आसमान को भी अपनी रॉब में जूते की नोक पर रखते हुए बदहाल कानून और आज के परिवेश में बेमतलब संविधान की दुहाई दे रहा है!

सिस्टम के साथ टकराने वाला हमेशा दबोच लिया जाता है या उसको टकराने का खामियाजा भुगतना पड़ता है कहीं ना कहीं उसके साथ साजिश कर उसकी जीवन नर्क बना दिया जाता है आज कानून सिर्फ वर्दी और रसूख वालों के हाथ में और नोटों की जात के रूप में व्यवस्था का घायल परिंदा है जो गुलामी के जंजीर में जकड़ अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है !

टकरा कर खुद को साबित करना आज लोहे की दीवाल में सुई डालने जैसा है क्योंकि आसपास और व्यवस्था पूरी तरीके से सौदागरों के हाथ में है न्याय और न्याय व्यवस्था दोनों दलहीज पर किसी कोने में लगी खूंटी पर टंगी पुराने कपड़ों जिस पर धूल और दीवारों से गिर रही तिल तिल कर टूटती भरोसा की चमक अंधेरे की तिलिस्म में अकेला बैठा बीमार सीना ताने खड़ा रहने वाला पहरेदार है !

लिखना तो बहुत है जो महसूस होता है वही कलम से लिखा है आपकी आवाज कृष्णा पंडित की कलम, प्यार और स्नेह दीजिए कलम से बदलेंगे तस्वीर अपने भारत की 

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