मिश्रित कृषि और कृषि प्रसंस्करण उद्योगों से होगा बलिया का विकास
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। वन्देमातरम् की 150 वी वर्षगांठ के अवसर पर ग्रामीण संविकास संस्थान एवं अर्थशास्त्र विभाग, जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में 31 वें पृथ्वी पर्व पर दो दिवसीय (04-05, 2026) राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हुआ। राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय दिवस प्रथम सत्र में बलिया के कृषि विकास का रोडमैप विषय पर परिचर्चा हुई। प्रो. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि बलिया की मृदा में पोषक तत्वों की कमी है जिसे दूर करने के लिए खर-पतवार, गोबर, केंचुए आदि से बनी खाद का प्रयोग कर अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है। प्रो. बृजेश सिंह ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए परंपरागत फसलों के साथ फल-फूल की खेती, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन आदि का प्रयोग कर किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। डॉ. जे पी सिंह, डॉ. हेमंत कुमार सिंह, डॉ. ए. पी. सिंह, डॉ. रामतीरथ, डॉ. मुनेन्द्र गंगवार ने अपने विचार रखे। बताया कि पारंपरिक खेती के साथ बागवानी, डेयरी, मशरूम, ड्रैगन फ्रूट, औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। सत्र की अध्यक्षता प्रो. यू. पी. सिंह, निदेशक, कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू ने और संचालन डॉ. अनुराधा राय ने किया। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. गणेश कुमार पाठक ने की। कहा कि कृषि उत्पादों के बेहतर भण्डारण और प्रसंस्करण आधारित उद्योगों की स्थापना से बलिया का विकास संभव है। इस सत्र में प्रो. संजय त्रिपाठी, डॉ. अनिल कुमार तिवारी, डॉ. आशिया परवीन आदि ने पर्यावरण एवं संपोषणीय जीवन शैली पर अपने विचार रखे।
समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजीत कुमार गुप्ता, कुलपति ने की। कहा कि एनईपी अंतरविषयक अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा देने की बात करती है। संपोषणीय विकास के लिए विभिन्न विषयों के विद्वानों को मिलकर कार्य करने की जरूरत है। यह संगोष्ठी इसी दिशा में उठाया हुआ छोटा सा कदम है।मुख्य अतिथि प्रो. के. एन. सिंह, कुलपति, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय ने कहा कि पाठ्यक्रम से बाहर निकलकर समाज की आवश्यकता पर शोध करने की जरूरत है। विशिष्ट अतिथि प्रो. राजनाथ यादव, पूर्व कुलपति, पूर्णिया विश्वविद्यालय ने बताया कि रासायनिक कीटनाशकों एवं खाद का प्रयोग करने के बजाय गाजर घास, बरसीम, लैंटाना आदि पौधों में पाये जाने वाले रासायनिक तत्वों का प्रयोग किया जा सकता है इससे पर्यावरण पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। संगोष्ठी का प्रतिवेदन डॉ. प्रज्ञा बौद्ध ने प्रस्तुत किया। सत्र का संचालन डॉ. प्रमोद शंकर पाण्डेय एवं धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव एस. एल. पाल ने दिया। संगोष्ठी के आयोजन में डॉ. शशि भूषण, डॉ. गुंजन कुमार, डॉ. रामसरन यादव की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकगण , प्रबन्धकगण, प्राचार्य गण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।










