पूर्वांचल राज्य संवाददाता दीपू तिवारी
दुद्धी( सोनभद्र) महुली क्षेत्र स्थित कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय में आयोजित शारदा संगोष्ठी, वार्षिक उत्सव और कक्षा 8वीं के छात्र-छात्राओं का विदाई समारोह ने पूरे विद्यालय परिसर को भावनाओं, उल्लास और प्रेरणा के रंगों से भर दिया। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि नन्हे सपनों को पंख लगाने और नए सफर की शुरुआत का साक्षी बन गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुई। इसके पश्चात छात्र-छात्राओं ने गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से ऐसा समां बांधा कि उपस्थित सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए। तालियों की गूंज के बीच बच्चों की प्रतिभा ने हर दिल में अपनी खास जगह बना ली।
विद्यालय के शिक्षक सर्वेश कुमार ने अपने उद्बोधन में बच्चों को जीवन का सार समझाते हुए कहा, “मेहनत और लगन ही वह चाबी है, जो सफलता के हर दरवाजे को खोलती है। अपने माता-पिता के सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहें। आपका उज्ज्वल भविष्य ही उनका सबसे बड़ा गर्व होगा।”
प्रभारी प्रधानाध्यापिका मीरा यादव ने भावुक शब्दों में कहा, “आज आप सभी छात्राएं इस विद्यालय से विदा हो रही हैं, लेकिन यहां के संस्कार, सीख और यादें हमेशा आपके साथ रहेंगी। जहां भी जाएं, अपने आचरण और मेहनत से अलग पहचान बनाएं और विद्यालय का नाम रोशन करें।”
कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर रविंदर कुमार ने बच्चों को जीवन में संतुलन का महत्व बताते हुए कहा, “पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। एक स्वस्थ शरीर ही आपके सपनों को साकार करने की असली ताकत देता है।”
इस अवसर पर उप स्वास्थ्य केंद्र की एकता सिंह ने अपने मधुर और भावुक गीत “मेरे प्यारे बच्चों, विदा हो रहे हो…” से कार्यक्रम का वातावरण भावनाओं से भर दिया। उनके गीत ने विदाई के दर्द और स्नेह की गहराई को बखूबी व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि आदर्श इंटरमीडिएट कॉलेज, महुली के प्रधानाचार्य राकेश कुमार कन्नौजिया ने कहा, “शिक्षा वह प्रकाश है, जो अंधकार को दूर कर जीवन को सही दिशा देती है। विद्यार्थी अपने भीतर छिपी क्षमता को पहचानें, लक्ष्य तय करें और उसे पाने के लिए निरंतर प्रयास करें। असफलता केवल एक पड़ाव है, अंत नहीं। दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेंगे, तो सफलता अवश्य कदम चूमेगी। आप ही इस देश का भविष्य हैं—अपने ज्ञान और संस्कारों से समाज को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।” उनके शब्दों ने बच्चों के मन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया।
विदाई के मार्मिक क्षण में विद्यालय के परिचारक गणेशयू शंकर भी भावुक हो उठे, और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े, जो विद्यालय परिवार के आपसी प्रेम और अपनत्व का जीवंत प्रमाण था।










