पूर्वाचल राज्य संवाददाता दीपू तिवारी
सोनभद्र विंढमगंज से कोन तक बन रही लगभग 22 किलोमीटर लंबी सड़क इन दिनों विकास के बजाय अव्यवस्था और लापरवाही का प्रतीक बनती जा रही है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रही इस सड़क पर गुणवत्ता मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिससे आम जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
निर्माण कार्य के दौरान पूरे मार्ग पर धूल का घना गुबार छाया रहता है। हालात ऐसे हैं कि इस सड़क से गुजरना लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। धूल के कारण राहगीरों, दुकानदारों और आसपास के ग्रामीणों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि धूल नियंत्रण के लिए आवश्यक पानी का नियमित छिड़काव नहीं किया जा रहा, जिससे समस्या और अधिक गंभीर हो गई है।
सिर्फ यही नहीं, सड़क निर्माण में डाली जा रही गिट्टी को भी मानकों के अनुरूप दबाया नहीं जा रहा है। नतीजतन, वाहनों के गुजरते ही गिट्टियां तेज रफ्तार से उछलती हैं, जो राहगीरों और वाहनों के लिए खतरा बन चुकी हैं।
कई स्थानों पर सड़क ऊबड़-खाबड़ और असमान बनी हुई है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे में स्थानीय लोग निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।










