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राष्ट्र की रक्षा हेतु खालसा पंथ की सृजन- सरदार कुलदीप सिंह

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी

काशी के राजधानी
रामनगर में सरदार कुलदीप सिंह ने बताया “चूकार अज हमां हीलते दर गुजशत,हलाल अस्त बुदेन ब शमशीर दस्त” अर्थात, जब न्याय पाने के लिए अन्याय रोकने के सभी साधन और प्रयास विफल हो जाएं तब हाथ में तलवार उठाना धर्म संगत है। उपरोक्त फारसी में कहे गए शब्द श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के है जिन्होंने 13 अप्रैल सन 1699 आनंदपुर साहिब में स्थित केस गढ़ में खालसा पंथ की सजना का एलान बैसाखी के दिन लाखों के समूह के सामने किया श्री गुरु नानक देव जी द्वारा निर्मल पथकी संपूर्णता करते हुए खालसा पंथ को सृजित किया जिसका अर्थ खलिस यानी कि शुद्ध पवित्र समरसता सम भाव वाला व्यक्तित्व।सिख से अमृत पान करके खालसा सजे नर को नारी को सिंह और राजकुमारी के नाम से सुशोभित कर भक्ति समानता सेवा धर्म और शांति एकता का प्रतीक पूरी मानवता के लिए न्याय धर्म के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है वैसाखी धार्मिक के साथ-साथ संस्कृतिक परंपरा भी है जो भूमिपुत्र किसानों की खेती से संबंधित है आज जब पुरे विश्व में आतंकवाद जात पात ऊंच नीच रंग भेद पंथ भेद चरम पर है तो श्री गुरु गोविंद सिंह महाराज के उच्चारित ये शब्द ही पुरे विश्व का कल्याण कर सकते,,,,मानस की जात सभै एक पहचानबो।श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने अपनी सभी जीत का श्रेय आकाल पुरुष को दिया और अपनी जीत पर अनमोल उच्चारण करते हैं,, वाहेगुरु जी दा खालसा,, वाहेगुरु जी दी फतेह, अर्थात खालसा इश्वर का है और जीत भी ईश्वर की। सरदार कुलदीप सिंह अध्यक्ष पंजाबी महासभा उत्तर प्रदेश सभी देश विदेश वासियों को वैसाखी की कोटन कोट बधाई दिया है।

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