सरकारी कार्य में बाधा व दलित उत्पीड़न के मामले में अदालत ने 25 हजार के मुचलके पर दी राहत
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी।
एसआईआर फॉर्म के सत्यापन के दौरान बीएलओ के साथ पहुंचे सफाईकर्मी पर कथित रूप से हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के मामले में आरोपित को अदालत से राहत मिल गई। विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने टिसौरा, चोलापुर निवासी संतोष सिंह को 25 हजार रुपये के एक जमानतदार व बंधपत्र पर जमानत देने का आदेश दिया।
अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विकास सिंह तथा उनके सहयोगी अधिवक्ता अखिलेश सिंह और आशुतोष उपाध्याय ने पक्ष रखा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार सैदपुर (गाजीपुर) निवासी सफाईकर्मी मुन्नर राम ने 10 फरवरी 2026 को चोलापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि वह ग्राम पंचायत टिसौरा, विकास खंड चोलापुर में सफाईकर्मी के पद पर कार्यरत है। उसी दिन पंचायत निर्वाचन नामावली में डुप्लीकेट मतदाताओं के सत्यापन के लिए उसकी ड्यूटी बीएलओ वंदना यादव के साथ लगाई गई थी।
बताया गया कि सत्यापन के दौरान वह संतोष सिंह के घर मकान संख्या 93, क्रम संख्या 762 पर दर्ज नाम के आधार कार्ड का विवरण मांगने पहुंचा। इस दौरान आरोप है कि संतोष सिंह ने उसका नाम और जाति पूछी। जैसे ही उसने अपना नाम मुन्नर राम और जाति बताई, आरोपित ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की और कथित रूप से मारपीट कर दी। आरोप यह भी है कि आरोपित ने उसकी स्कूटी की चाबी छीन ली और जान से मारने की धमकी दी।
पीड़ित के अनुसार आसपास के लोगों के हस्तक्षेप से उसकी जान बच सकी और बाद में स्कूटी की चाबी वापस मिली। घटना के आधार पर पुलिस ने संतोष सिंह के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और दलित उत्पीड़न समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
वहीं अदालत में बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि वादी सत्यापन के दौरान लोगों से 500 रुपये की मांग कर रहा था, जिसका विरोध करने पर उसने रंजिशन दो दिन बाद मनगढ़ंत आरोप लगाते हुए फर्जी प्राथमिकी दर्ज करा दी।
दोनों पक्षों की दलीलों और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन के बाद अदालत ने आरोपित की जमानत मंजूर कर ली।










