तमिलनाडु में चुनावी सरगर्मी के बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तिरुवल्लूर जिले के पोंनेरी में आयोजित जनसभा में उन्होंने दावा किया कि हाल ही में संसद में लाया गया विधेयक महिला आरक्षण के नाम पर पेश किया गया, लेकिन इसके पीछे असली उद्देश्य परिसीमन के जरिए दक्षिणी राज्यों, खासकर तमिलनाडु की राजनीतिक ताकत को कमजोर करना है।
🔥 परिसीमन को लेकर बड़ा आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि यह कदम केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत और छोटे राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम करने की एक “सुनियोजित रणनीति” है।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर राज्यों की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
❤️ “तमिलनाडु से भावनात्मक जुड़ाव”
अपने भाषण में राहुल गांधी ने कहा कि भले ही उनका जन्म तमिलनाडु में नहीं हुआ, लेकिन वे खुद को यहां के लोगों से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।
उन्होंने अपने पिता राजीव गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने तमिलनाडु के लिए अपना सब कुछ दिया।
🏛️ “भारत राज्यों का संघ है”
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि भारत एक संघीय ढांचा है, जहां हर राज्य को अपनी भाषा, संस्कृति और पहचान बनाए रखने का अधिकार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिल भाषा और संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।
⚖️ महिला आरक्षण बिल पर सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि जिस विधेयक को हाल ही में पेश किया गया, वह नया नहीं है बल्कि 2023 में पारित कानून से जुड़ा है।
उनका दावा है कि इसके पीछे छिपा एजेंडा परिसीमन के जरिए संसद में दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी कम करना था।
🗣️ “एक राष्ट्र, एक नेता, एक भाषा” पर निशाना
उन्होंने केंद्र की कार्यशैली पर हमला करते हुए कहा कि “एक राष्ट्र, एक नेता, एक भाषा” जैसी सोच भारत की विविधता पर आघात है।
उन्होंने कहा कि ‘INDIA’ गठबंधन ऐसे किसी भी केंद्रीकरण का विरोध करेगा और राज्यों के अधिकारों की रक्षा करेगा।
🗳️ चुनावी समीकरण और मुकाबला
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है, जबकि 4 मई को मतगणना होगी।
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेतृत्व वाले गठबंधन और अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन के बीच माना जा रहा है।
इसके अलावा अभिनेता-से-राजनेता बने विजय की पार्टी भी चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही है।
📢 निष्कर्ष
तमिलनाडु में चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। परिसीमन, महिला आरक्षण और संघीय ढांचे जैसे मुद्दे अब चुनावी बहस के केंद्र में आ गए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दे राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकते हैं।










