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काशी में शिव बारात समिति द्वारा 23 अप्रैल को भव्य रूप से मनाई जाएगी गंगा सप्तमी , होंगे विविध अनुष्ठान… दिलीप सिंह

पुर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी

वाराणसी। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला पावन पर्व गंगा सप्तमी इस वर्ष 23 अप्रैल 2026, गुरुवार को शाम 5:00 बजे से घाट किनारे होगा काशी में श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस विशेष अवसर पर सामाजिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संस्था शिव बारात समिति द्वारा भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसकी अगुवाई वरिष्ठ समाजसेवी दिलीप सिंह कर रहे हैं। हर वर्ष की भांति इस बार भी उनके नेतृत्व में कार्यक्रम को दिव्य और भव्य स्वरूप देने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
वरिष्ठ समाजसेवी दिलीप सिंह ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि गंगा सप्तमी का पर्व सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां गंगा का पुनर्जन्म हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार ऋषि जह्नु ने गंगा के प्रचंड प्रवाह से क्रोधित होकर उन्हें अपने कमंडल में समाहित कर लिया था, किंतु देवताओं के अनुरोध पर उन्होंने गंगा को अपने कान से पुनः प्रवाहित किया। इसी कारण यह दिन जाह्नु सप्तमी के रूप में भी प्रसिद्ध है।
दिलीप सिंह ने बताया कि मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था की जीवनरेखा हैं। गंगा सप्तमी के दिन उनकी पूजा-अर्चना करने से समस्त पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की।
काशी में गंगा सप्तमी का विशेष महत्व है। इस दिन शीतला घाट पर पारंपरिक रूप से मां गंगा के चरणों में आर-पार की साड़ियों की माला अर्पित की जाती है, जो श्रद्धा और भक्ति का अनूठा प्रतीक है। इसके पश्चात विधिवत पूजन और भव्य गंगा आरती का आयोजन किया जाता है। सायं 6 बजे होने वाली यह आरती श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र होती है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
दिलीप सिंह के नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूती प्रदान करता है। उनके मार्गदर्शन में वर्षों से यह आयोजन निरंतर भव्यता के साथ संपन्न हो रहा है, जिससे काशी की आध्यात्मिक पहचान और भी सशक्त हो रही है।
गौरतलब है कि गंगा दशहरा और गंगा सप्तमी दोनों पर्वों का अलग-अलग महत्व है। जहां गंगा दशहरा के दिन मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, वहीं गंगा सप्तमी को उनके पुनः प्रकट होने का दिन माना जाता है।
काशीवासियों एवं देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व एक विशेष आध्यात्मिक अवसर लेकर आता है। इस दिन मां गंगा के चरणों में दीपदान करने और आरती में शामिल होने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बनने की अपील की है।

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