पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर कई चर्चित मौतों को लेकर बहस तेज हो गई है। Suvendu Adhikari के करीबी माने जाने वाले चार लोगों की अलग-अलग समय पर हुई मौतों ने राजनीतिक गलियारों में सवाल खड़े किए हैं। हालांकि अब तक किसी भी मामले में कोई बड़ा आधिकारिक खुलासा सामने नहीं आया है।
▪️ Suvendu Adhikari के करीबी माने जाने वाले कई लोगों की मौत को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में फिर सवाल उठने लगे हैं।
▪️ पूर्व एयरफोर्स कर्मी चन्द्रनाथ रथ, जो बाद में शुभेंदु अधिकारी के PA और करीबी सहयोगी बताए जाते थे, हाल ही में गोली लगने से मृत पाए गए।
▪️ प्रदीप झा, जिन्हें वर्ष 2013 में शुभेंदु अधिकारी का निजी सहायक बताया गया था, कोलकाता में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले थे।
▪️ शुभब्रोतो चक्रबोर्ति, जो सुरक्षा टीम और बॉडीगार्ड से जुड़े बताए जाते थे, वर्ष 2018 में गोली लगने के बाद मौत का शिकार हुए।
▪️ पुलक लाहिड़ी, जिन्हें नंदीग्राम चुनाव के दौरान करीबी चुनावी सहयोगी माना जाता था, उनकी मौत पर भी कई सवाल उठे थे।
▪️ इन सभी घटनाओं ने समय-समय पर बंगाल की राजनीति में विवाद और चर्चाओं को जन्म दिया।
▪️ विपक्षी दलों और सोशल मीडिया पर इन मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
▪️ हालांकि अब तक किसी भी मामले में कोई बड़ा आधिकारिक खुलासा सार्वजनिक नहीं हुआ है।
▪️ राजनीतिक गलियारों में इन मौतों को लेकर अटकलों और चर्चाओं का दौर जारी है।
▪️ फिलहाल इन सभी मामलों को लेकर “सवाल अब भी बाकी हैं” की चर्चा फिर तेज हो गई है।
हाल ही में चन्द्रनाथ रथ की मौत ने इस चर्चा को फिर हवा दे दी। चन्द्रनाथ रथ पूर्व एयरफोर्स कर्मी थे और बाद में शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) तथा करीबी सहयोगी के रूप में जाने जाते थे। रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
इसके अलावा प्रदीप झा का मामला भी लंबे समय तक चर्चा में रहा। वर्ष 2013 में उन्हें शुभेंदु अधिकारी का निजी सहायक बताया जाता था। उनकी मौत कोलकाता में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी, जिसके बाद कई राजनीतिक सवाल उठे थे।
शुभब्रोतो चक्रबोर्ति, जो सुरक्षा टीम और बॉडीगार्ड से जुड़े बताए जाते थे, वर्ष 2018 में गोली लगने के बाद मृत पाए गए। वहीं नंदीग्राम चुनाव के दौरान करीबी चुनावी सहयोगी माने जाने वाले पुलक लाहिड़ी की मौत पर भी उस समय काफी विवाद हुआ था।
इन सभी घटनाओं को लेकर समय-समय पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इन मामलों को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि अब तक किसी भी जांच एजेंसी की ओर से कोई ऐसा आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे इन घटनाओं के पीछे की पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सके।
फिलहाल बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा फिर चर्चा में है और कई लोग इन मामलों में पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।










