गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में सोमवार को खाकी और कानून व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई। न्याय न मिलने से हताश एक सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) पीड़िता अपने 3 साल के मासूम बेटे को कमर और पीठ से बांधकर 80 फीट ऊंचे मोबाइल टॉवर पर चढ़ गई। महिला का आरोप था कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है और उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं।
कड़कड़ाती धूप में करीब 6 घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद, खुद जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) के मौके पर पहुंचने और तत्काल कार्रवाई के लिखित आश्वासन के बाद महिला को सुरक्षित नीचे उतारा जा सका।
क्या है पूरा मामला? (The Background)
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़िता धानेपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली है। महिला का आरोप है कि कुछ समय पहले उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था। काफी मिन्नतें करने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस (FIR) तो दर्ज कर लिया, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
पीड़िता का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और केस वापस न लेने पर उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। स्थानीय पुलिस स्टेशन के चक्कर काट-काट कर थक चुकी महिला ने आखिरकार ध्यान आकर्षित करने के लिए यह आत्मघाती कदम उठाया।
6 घंटे तक सांसें अटका देने वाला ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’
सोमवार सुबह करीब 10 बजे स्थानीय लोगों ने महिला को बच्चे समेत मोबाइल टॉवर पर चढ़ते देखा। देखते ही देखते वहां सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई।
घटनाक्रम पर एक नज़र:
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सुबह 10:15 बजे: स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी।
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दोपहर 12:00 बजे: पुलिस प्रशासन ने लाउडस्पीकर से महिला को समझाने की कोशिश की, लेकिन महिला “आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करो” के नारे लगाती रही।
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दोपहर 02:30 बजे: चिलचिलाती धूप और गर्मी के कारण 3 साल के बच्चे की हालत बिगड़ने की आशंका से प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
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शाम 04:00 बजे: जिले के DM और SP खुद मौके पर पहुंचे और महिला से सीधे बात की।
पीड़िता की चीख: “अगर मुझे न्याय नहीं मिला, तो मैं अपने बच्चे के साथ यहीं से कूद जाऊंगी। पुलिस बिक चुकी है, वो पैसों के लिए अपराधियों को बचा रही है!”
DM के आश्वासन पर उतरी नीचे: ताजा अपडेट (Latest Update)
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गोंडा के जिला मजिस्ट्रेट (DM) ने पीड़िता को आश्वस्त किया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं और अगले 24 घंटे के भीतर एक्शन लिया जाएगा।
प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की लिखित गारंटी मिलने के बाद, शाम करीब 4:15 बजे महिला भारी मशक्कत के बाद बच्चे के साथ सुरक्षित नीचे उतरी। नीचे उतरते ही मेडिकल टीम ने तुरंत बच्चे और मां का स्वास्थ्य परीक्षण किया। दोनों फिलहाल सुरक्षित हैं।
प्रशासन का बयान:
गोंडा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया:
“महिला की शिकायत पर पहले ही सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज है। विवेचना जारी थी, लेकिन इस घटना के बाद लापरवाही बरतने वाले स्थानीय पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश दी जा रही है, जल्द ही वे सलाखों के पीछे होंगे।”
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा: ‘टॉवर’ बना न्याय का नया मंच?
इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली और ‘महिला सुरक्षा’ के दावों पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। यूज़र्स का कहना है कि अगर एक मां को अपनी और अपने बच्चे की जान जोखिम में डालकर न्याय मांगना पड़ रहा है, तो यह पूरे सिस्टम की नाकामी है।
आपकी क्या राय है? क्या पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए ऐसे कदम उठाने पर मजबूर होना प्रशासन की ढिलाई को नहीं दर्शाता? कमेंट सेक्शन में अपनी राय ज़रूर दें और इस खबर को शेयर करें।










