राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच की निगरानी करने से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पूरी हो। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित की जा रही विशेष जांच टीम (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने याचिकाकर्ता की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट से SIT जांच की सीधी निगरानी करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि वह जांच की मॉनिटरिंग नहीं करेगी, लेकिन यह जरूर सुनिश्चित किया जाएगा कि जांच प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़े और इसमें पूरी पारदर्शिता बरती जाए। सुप्रीम कोर्ट ने SIT को जांच की प्रगति रिपोर्ट यानी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि जांच में वित्तीय पहलुओं को देखते हुए विशेषज्ञों को शामिल किया जाना जरूरी है, ताकि चंदे से जुड़े सभी लेन-देन और दस्तावेजों की गहन जांच हो सके।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित की जा रही SIT का नेतृत्व एस. किरण कर रहे हैं। टीम में DIG, IG और SP स्तर के पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब टीम में वित्तीय जांच के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और फॉरेंसिक ऑडिटर को भी सदस्य बनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अदालत के सामने दलील रखी कि देशभर के श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए बड़ी संख्या में चंदा दिया था। कई लोगों ने 100 रुपये, 500 रुपये और अन्य राशि के रूप में योगदान दिया। आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में यह राशि कथित रूप से ट्रस्ट तक नहीं पहुंची।
याचिकाकर्ता ने मांग की कि ट्रस्ट से जुड़ी सभी रसीदों और चंदे के रिकॉर्ड को वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIT को अपनी जांच पूरी करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का मौका दिया जाना चाहिए। अदालत ने भरोसा जताया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इससे पहले 20 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि वह चल रही पुलिस जांच को एक विशेष जांच टीम की निगरानी में रखने पर विचार करे। अदालत ने उस तीन सदस्यीय SIT का भी उल्लेख किया था, जिसने मामले में शुरुआती जांच के दौरान कथित धोखाधड़ी से जुड़े कुछ सबूत जुटाए थे।
अब सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देश के बाद SIT जांच में पुलिस अधिकारियों के साथ वित्तीय विशेषज्ञों की भूमिका भी अहम होगी। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मामले से जुड़े आर्थिक रिकॉर्ड, चंदे की राशि, रसीदों और अन्य दस्तावेजों की निष्पक्ष तरीके से जांच हो। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। तब तक SIT को जांच की प्रगति और अब तक की गई कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।









