लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग (UPPCL) के लिए ‘स्मार्ट मीटर’ अब गले की फांस बनता जा रहा है। उपभोक्ताओं को बिना वजह परेशान करने और कई दिनों तक अंधेरे में रखने के मामले में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर ₹7.18 लाख का भारी जुर्माना ठोंका है।
नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की पीठ ने उपभोक्ताओं के हक में फैसला सुनाते हुए बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर तल्ख टिप्पणी भी की है।
💡 मामला क्या है? (क्यों लगा बिजली विभाग पर जुर्माना)
यह पूरा मामला स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बिना किसी पूर्व सूचना या वैध कारण के कई दिनों तक बिजली न देने से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मामले को आयोग के सामने पुरजोर तरीके से उठाया था।
-
अंधेरे में रहे उपभोक्ता: स्मार्ट मीटर में तकनीकी खामियों और विभागीय लापरवाही के चलते कई उपभोक्ताओं के घरों की बत्ती गुल रही।
-
नियमों का उल्लंघन: बिजली विभाग ने बिना नोटिस दिए और तय गाइडलाइंस को ताक पर रखकर उपभोक्ताओं की बिजली काटी।
-
अधिकारियों की उदासीनता: उपभोक्ताओं द्वारा शिकायत किए जाने के बाद भी कई दिनों तक बिजली बहाली नहीं की गई, जिसे आयोग ने ‘गंभीर सेवा दोष’ माना।
⚖️ आयोग के फैसले की बड़ी बातें
नियामक आयोग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए न सिर्फ जुर्माना लगाया, बल्कि भविष्य के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए हैं:
| फैसला / निर्देश | विवरण |
| कुल जुर्माना | UPPCL पर ₹7.18 लाख का आर्थिक दंड। |
| मुआवजा राशि | जुर्माने की इस राशि से प्रभावित उपभोक्ताओं को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के लिए मुआवजा दिया जाएगा। |
| स्मार्ट मीटर पर चेतावनी | आयोग ने साफ किया कि स्मार्ट मीटर की आड़ में उपभोक्ताओं का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। |
“यह उपभोक्ताओं के संघर्ष की बड़ी जीत है। बिजली विभाग स्मार्ट मीटर को अपनी मनमानी का जरिया नहीं बना सकता। नियमों का उल्लंघन करने पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।”
— अवधेश कुमार वर्मा, अध्यक्ष, उ.प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद










