सपा प्रमुख ने दान राशि में हेराफेरी का दावा कर कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की; श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आरोपों को सिरे से नकारा।
अयोध्या/लखनऊ: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही यह पावन स्थल देश-दुनिया की आस्था का केंद्र बना हुआ है। लेकिन इसी बीच, राम मंदिर को लेकर एक नया और बेहद संवेदनशील सियासी विवाद खड़ा हो गया है। इस बार विवाद मंदिर की भूमि या इतिहास को लेकर नहीं, बल्कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान पात्र की राशि को लेकर है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंदिर के दान पात्र से एकत्र की गई राशि में कथित गबन और हेराफेरी का संगीन आरोप लगाया है, जिसके बाद यूपी की राजनीति में भूचाल आ गया है।
📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights)
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करोड़ों की हेराफेरी का आरोप: सपा प्रमुख अखिलेश यादव का दावा है कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये गायब हो गए हैं।
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न्यायिक जांच की मांग: विपक्ष ने इस कथित गड़बड़ी को ट्रस्ट के लिए शर्मनाक बताते हुए अदालत से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है।
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ट्रस्ट की सफाई: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक करार दिया है।
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पारदर्शिता का दावा: ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार, दान की गिनती और उसका हिसाब अत्याधुनिक नियमों और पूरी पारदर्शिता के साथ रखा जाता है।
अखिलेश यादव का तीखा हमला: ‘भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़’
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाते हुए सोशल मीडिया और बयानों के जरिए सरकार और मंदिर प्रबंधन को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि रामलला के चरणों में देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा समर्पित की गई भारी-भरकम धनराशि में बड़े स्तर पर पारदर्शिता की कमी है और करोड़ों रुपये का गबन हुआ है।
“राम मंदिर में आने वाला चढ़ावा देश के करोड़ों गरीबों और सनातनी भक्तों की आस्था का प्रतीक है। अगर वहां से राशि गायब हो रही है, तो यह बेहद गंभीर और शर्मनाक है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और माननीय अदालत को इसका स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।” > — अखिलेश यादव, अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
राम मंदिर ट्रस्ट का करारा जवाब: ‘आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत’
विपक्ष के इन तीखे हमलों पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी बेहद सख्त रुख अपनाया है। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्यों और पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता और आधिकारिक बयानों के जरिए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर में आने वाले एक-एक पैसे का हिसाब पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी है। दान पात्रों को सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में खोला जाता है और बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में पैसों की गिनती होती है। ट्रस्ट ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए जानबूझकर राम मंदिर और भक्तों की आस्था को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।
धार्मिक विवाद से लेकर दान पात्र तक: एक नजर इतिहास पर
गौरतलब है कि राम मंदिर का मुख्य विवाद सदियों पुराना धार्मिक और भूमि स्वामित्व का था। दशकों चली कानूनी लड़ाई के बाद, 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में राम जन्मभूमि हिंदू पक्ष को सौंपी थी, जिसके बाद ट्रस्ट का गठन हुआ और मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। लेकिन अब, मंदिर बनने के बाद इसके वित्तीय प्रबंधन और चढ़ावे को लेकर शुरू हुई यह नई ‘जंग’ 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी मोड़ ले सकती है।










