लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित जगद्गुरु रामभद्राचार्य की श्रीरामकथा के नौवें और अंतिम दिन शामिल हुए। व्यासपीठ की आरती उतारने और जगद्गुरु का आशीर्वाद लेने के बाद सीएम योगी ने जनसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में सीएम ने त्रेतायुग के प्रसंगों को आज के दौर से जोड़ते हुए ‘लैंड जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ पर बड़ा प्रहार किया।
सीएम योगी ने कहा, “प्रभु श्रीराम ने हमेशा नारी गरिमा के लिए काम किया। यह आज के समय में ‘लव जिहाद’ रोकने के लिए सबसे आदर्श उदाहरण है। इसके साथ ही, खर-दूषण और मारीच-सुबाहु जैसे राक्षस रावण के इशारे पर संतों की जमीनें हड़पकर ‘लैंड जिहाद’ चला रहे थे।”
⚡ सीएम योगी के संबोधन की 4 बड़ी बातें
1. ‘मारीच और सुबाहु रावण के साथ लैंड जिहाद के अभियान में थे’
सीएम योगी ने रावण राज का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी नकारात्मक ताकतें आती हैं, तो वे सिर्फ उजाड़ और विनाश करती हैं।
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कब्जे का खेल: खर और दूषण ने पूरे दंडकारण्य पर अवैध कब्जा कर रखा था, जबकि ताड़का बक्सर तक आ चुकी थी।
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संतों पर अत्याचार: मारीच और सुबाहु साधु-संतों को उनकी जगहों से जबरन हटाकर ‘लैंड जिहाद’ के अभियान में जुटे थे।
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अंजाम: जो भी राम का द्रोह (विरोध) करता है, वह मिट जाता है। रावण और मारीच जैसे लोग उच्च कुल में जन्म लेने के बाद भी अपने कुकर्मों के कारण पशुवत मारे गए।
2. ‘जिनकी भारत में आस्था नहीं, उनके लिए यह धरती धर्मशाला नहीं’
राष्ट्रवाद और देश के प्रति निष्ठा पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
“जो लोग भारत के प्रति निष्ठा नहीं रखते, जिनकी भारत की संस्कृति और संस्कारों में आस्था नहीं है, उनके लिए भारत की धरती कोई ‘धर्मशाला’ नहीं हो सकती। कुछ ताकतें धर्म और जाति के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास करेंगी, लेकिन हमें एकजुट रहना होगा।”
3. ‘शायद ही कोई ऐसा भारतीय हो, जिसके DNA में राम न हों’
राम जन्मभूमि आंदोलन का स्मरण करते हुए सीएम ने कहा कि पूज्य संतों ने इस आंदोलन को अपने जीवन-मरण का विषय बना लिया था।
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491 वर्षों का संघर्ष: रामजन्मभूमि के लिए करीब 5 सदियों तक किसी न किसी रूप में आंदोलन चलता रहा।
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एकता का सूत्र: राम का नाम उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ता है। शायद ही कोई ऐसा भारतीय होगा, जिसके डीएनए में भारत हो और वह श्रीराम को न मानता हो।
4. ‘जो काम मध्यकाल में तुलसीदास ने किया, वही आज रामभद्राचार्य कर रहे हैं’
सीएम योगी ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य की तुलना गोस्वामी तुलसीदास से की। उन्होंने कहा:
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जनचेतना की जागृति: मध्यकाल में तुलसीदास जी ने विदेशी आक्रांताओं के सामने समाज को भक्ति के मार्ग से एकजुट किया था। आज वही काम जगद्गुरु रामभद्राचार्य कर रहे हैं।
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दिव्यांगों के लिए कार्य: जगद्गुरु ने देश के पहले दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना चित्रकूट में की। इतनी व्यस्तता के बाद भी वे समाज कल्याण और श्रीराम के आचरण को फैलाने के लिए कथा सुना रहे हैं।
🤫 मंच पर दिखा खास पल: 1 मिनट तक कान में की बात
श्रीरामकथा के समापन सत्र के दौरान मंच पर एक बेहद खास और भावुक पल भी देखने को मिला। सीएम योगी ने जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया, तब जगद्गुरु करीब 1 मिनट तक सीएम योगी के कान में कुछ गुप्त चर्चा करते नजर आए। इसके बाद उन्होंने अपनी विशेष पोटली से कुछ निकालकर मुख्यमंत्री को आशीर्वाद स्वरूप भेंट किया, जिसे सीएम ने सहर्ष स्वीकार किया।










