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भगवान वाल्मीकि तीर्थ के विकास को लेकर वाल्मीकि संत समाज एकजुट, प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की उठाई मांग

संत गिरधारी नाथ जी महाराज की देखरेख और संत मलकीत नाथ जी महाराज की अगुवाई में हुई अहम बैठक, चेयरमैन ओम प्रकाश गब्बर भी रहे मौजूद

अमृतसर, 10 जून (राजू वालिया) – संत समाज भगवान वाल्मीकि आश्रम धूणा साहिब ट्रस्ट (रजि.) तथा सतगुरु ज्ञान आश्रम पावन वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर की ओर से भगवान वाल्मीकि तीर्थ के विकास और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ज्ञान आश्रम पावन वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर के प्रमुख संत गिरधारी नाथ जी महाराज की देखरेख तथा धूणा साहिब के गद्दीनशीन संत मलकीत नाथ जी महाराज की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में ज्ञान आश्रम पावन वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर के प्रमुख संत गिरधारी नाथ जी महाराज, संत समाज के प्रमुख संत सेवक नाथ जी महाराज, संत समाज महासभा के चेयरमैन ओम प्रकाश गब्बर सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा एवं समाज के गणमान्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए संत मलकीत नाथ जी महाराज ने कहा कि समूचे वाल्मीकि संत समाज और वाल्मीकि समुदाय को भगवान वाल्मीकि तीर्थ के विकास, सौंदर्यीकरण तथा श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं के निर्माण संबंधी प्रयासों पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को प्राथमिकता के आधार पर तीर्थ स्थल के विकास कार्यों को पूरा करना चाहिए, ताकि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि भगवान वाल्मीकि तीर्थ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े प्रत्येक निर्णय में वाल्मीकि संत समाज तथा समुदाय की भूमिका को उचित महत्व दिया जाना चाहिए। संत मलकीत नाथ जी महाराज ने कहा कि राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल का वाल्मीकि संत समाज से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, इसलिए तीर्थ के विकास और प्रबंधन से जुड़े मामलों में वाल्मीकि संत समाज और समुदाय की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।बैठक के दौरान संत समाज महासभा की ओर से यह मांग भी उठाई गई कि भगवान वाल्मीकि तीर्थ के विकास, रखरखाव और प्रबंधन के लिए गठित की जाने वाली किसी भी समिति में वाल्मीकि संत समाज का उचित और प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे न केवल समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि विकास कार्य भी पारदर्शिता और आपसी सहमति के साथ आगे बढ़ सकेंगे। संत मलकीत नाथ जी महाराज और चेयरमैन ओम प्रकाश गब्बर ने कहा कि संत बाल योगी प्रगट नाथ जी महाराज द्वारा किए गए त्याग, तपस्या और लंबे समय तक किए गए प्रयासों के कारण ही भगवान वाल्मीकि तीर्थ को देश-विदेश में विशेष पहचान प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि तीर्थ के विकास से संबंधित प्रत्येक निर्णय संत समाज की सलाह और सहयोग से लिया जाना चाहिए, ताकि इस पवित्र स्थल की मर्यादा और परंपराओं को कायम रखा जा सके। बैठक के अंत में संत समाज महासभा ने पंजाब सरकार से अपील की कि भगवान वाल्मीकि तीर्थ से संबंधित प्रत्येक महत्वपूर्ण निर्णय में संत समाज और वाल्मीकि समुदाय की राय को शामिल किया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और संत समाज के आपसी सहयोग से तीर्थ स्थल का सर्वांगीण विकास होगा तथा आने वाले समय में यह धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित होगा। 

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