50 लाख रुपये मांगने और दबाव बनाने का आरोप, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
पूर्वांचल राज्य वाराणसी। डीजे स्टेंट प्रकरण को लेकर चल रहे विवाद में मंगलवार को नया मोड़ आ गया, जब पैनेशिया हॉस्पिटल प्रशासन ने प्रेस नोट जारी कर मरीज पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को ख़ारिज करते हुए उसे तथ्यहीन, भ्रामक और एकपक्षीय बताया। अस्पताल प्रशासन ने दावा किया कि उपलब्ध चिकित्सा अभिलेख उनके पक्ष को स्पष्ट रूप से प्रमाणित करते हैं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराए जाने की आवश्यकता है।
प्रेस नोट के अनुसार मंजू देवी को लगभग दो वर्ष पूर्व पीसीएनएल एवं डीजे स्टेंट इन्सर्शन ऑपरेशन के लिए पैनेशिया हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। यह ऑपरेशन वरिष्ठ यूरो सर्जन डॉ. विनीत सिंह द्वारा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किया गया था। अस्पताल का कहना है कि ऑपरेशन के बाद मरीज और उनके परिजनों को स्पष्ट रूप से बताया गया था कि डीजे स्टेंट को लगभग 30 दिनों के भीतर निकलवाना आवश्यक है। यह जानकारी मौखिक रूप से देने के साथ-साथ चिकित्सा रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई थी।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज को सामान्य स्थिति में डिस्चार्ज किया गया था और उसके बाद निर्धारित समय के भीतर फॉलो-अप कर स्टेंट निकलवाना मरीज एवं परिजनों की जिम्मेदारी थी। रिकॉर्ड के अनुसार पिछले दो वर्षों में इस संबंध में मरीज या उनके परिजनों ने संबंधित यूरोलॉजी टीम से कोई संपर्क नहीं किया।
प्रेस नोट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष मिश्रा का उक्त ऑपरेशन या डीजे स्टेंट प्रबंधन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। अस्पताल के अनुसार बाद में किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण मरीज ने डॉ. मिश्रा से परामर्श लिया था। आर्थिक रूप से कमजोर होने और आयुष्मान योजना का लाभार्थी होने के कारण डॉ. मिश्रा ने मरीज को शुल्क में विशेष रियायत दी थी तथा दूसरी बार निःशुल्क परामर्श भी दिया था।
अस्पताल प्रशासन ने मरीज के पुत्र शुभम सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मरीज की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के पीछे कई अन्य चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं, जिनकी विशेषज्ञों द्वारा जांच आवश्यक है। बिना चिकित्सकीय परीक्षण और विशेषज्ञ राय के किसी एक चिकित्सक या संस्थान को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
प्रेस नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि 9 जून को शुभम सिंह 15 से 20 लोगों के साथ अस्पताल परिसर पहुंचे और नारेबाजी करते हुए अस्पताल की छवि धूमिल करने का प्रयास किया। अस्पताल ने यह भी दावा किया कि इससे पहले उनसे 50 लाख रुपये की मांग की गई थी तथा राशि न देने पर मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से बदनाम करने की चेतावनी दी गई थी।
पैनेशिया हॉस्पिटल प्रशासन ने कहा है कि वह किसी भी वैधानिक और न्यायिक जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार है। साथ ही प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अवैध मांग, दबाव या धमकी को स्वीकार नहीं किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।









