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UP Panchayat Election: यूपी पंचायत चुनाव की फाइनल वोटर लिस्ट जारी! 2 करोड़ नाम कटे, हर वोटर को मिला ‘खास नंबर’

लखनऊ / कानपुर: उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने बुधवार को अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) का प्रकाशन कर दिया है। करीब 169 दिनों तक चले गहन सत्यापन, दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद जारी हुई इस फाइनल लिस्ट में आयोग ने इस बार कई बड़े ऐतिहासिक बदलाव किए हैं।

इस बार उत्तर प्रदेश के हर पंचायत मतदाता को ट्रैक और वेरिफाई करने के लिए 9 अंकों का एक यूनिक ‘स्टेट वोटर नंबर’ (SVN) जारी किया गया है। सूची जारी होते ही राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ने के कारण कई जिलों में डिजिटल वोटर लिस्ट डाउनलोड करने में तकनीकी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है।

📊 आंकड़ों की ज़ुबानी: यूपी में वोटर्स का गणित

राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह के अनुसार, इस महा-अभियान के बाद उत्तर प्रदेश में पंचायत वोटर्स की संख्या में नेट 29 लाख से अधिक का इजाफा हुआ है।

विवरण मतदाताओं की संख्या
कुल फाइनल मतदाता (2026) 12,58,51,570 (12.58 करोड़)
वोटर लिस्ट पुनरीक्षण से पहले संख्या 12,29,50,052 (12.29 करोड़)
कुल नए जोड़े गए नाम 2,32,24,805 (2.32 करोड़)
कुल काटे गए नाम (मृत्यु/शिफ्ट/फर्जी) 2,03,23,287 (2.03 करोड़)
नेट मतदाताओं की कुल वृद्धि 29,01,518 (29.01 लाख)

कहाँ बढ़े सबसे ज़्यादा वोटर, कहाँ हुई कमी?

  • सर्वाधिक वृद्धि वाला जिला: पूर्वांचल का बलिया पहले स्थान पर रहा, जहाँ सबसे ज़्यादा 1,60,376 नए मतदाता बढ़े। इसके बाद लखीमपुर खीरी, देवरिया और सिद्धार्थनगर का नंबर है।

  • वोटर घटने वाले जिले: प्रदेश के 7 जिलों में पुनरीक्षण के बाद वोटर्स की संख्या कम हुई है, जिनमें आगरा, आजमगढ़, एटा, कानपुर देहात, गाजीपुर, मैनपुरी और हापुड़ शामिल हैं। गाजीपुर में सबसे ज्यादा 94,757 नाम काटे गए।

🛡️ फर्जी वोटिंग पर फुलस्टॉप: 9 अंकों का SVN और FRS तकनीक

  1. स्टेट वोटर नंबर (SVN): यूपी के चुनावी इतिहास में पहली बार हर पंचायत वोटर को 9 अंकों का एक विशिष्ट आइडेंटिटी नंबर दिया गया है। इससे एक ही वोटर का नाम दो अलग-अलग ग्राम पंचायतों या वार्डों में होना नामुमकिन हो जाएगा।

  2. फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS): आयोग इस बार डुप्लिकेट वोटिंग रोकने के लिए चेहरे की पहचान करने वाले FRS ऐप का इस्तेमाल करने जा रहा है। इसका सफल ट्रायल शाहजहांपुर और कुशीनगर के उप-चुनावों में किया जा चुका है।

⏳ चुनाव अभी टले; अगले 6 महीने ‘प्रशासक’ संभालेंगे कुर्सी

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बीती 26 मई को समाप्त हो चुका है। समय पर चुनाव न हो पाने की स्थिति में योगी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए निवर्तमान प्रधानों को ही अगले 6 महीने के लिए प्रशासक (Administrator) नियुक्त कर दिया है।

  • OBC आरक्षण का पेंच: सरकार ने पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण की समीक्षा के लिए एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है, जिसे 6 महीने में रिपोर्ट सौंपनी थी।

  • इलाहाबाद हाई कोर्ट का कड़ा रुख: हालांकि, जल्द चुनाव कराने को लेकर दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है और आयोग को जुलाई में ही अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

🗳️ विधानसभा चुनाव पर ‘सेंध’ का डर! राजनीतिक दल क्यों हैं परेशान?

उत्तर प्रदेश में अगले साल (फरवरी-मार्च) विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, मुख्यधारा की पार्टियां विधानसभा चुनाव के ठीक पहले पंचायत चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं। इसके पीछे 3 मुख्य वजहें हैं:

  • स्थानीय गुटबाजी: पंचायत चुनाव दलीय (Party Symbols) आधार पर नहीं बल्कि स्थानीय प्रभाव पर लड़े जाते हैं। ऐसे में एक ही पार्टी के दो मजबूत कार्यकर्ता आमने-सामने आ जाते हैं, जिससे पार्टी कैडर बिखर जाता है।

  • वर्चस्व की जंग: प्रधानी और जिला पंचायत की रंजिशें अक्सर मुख्य विधानसभा चुनाव के समीकरणों को बिगाड़ देती हैं।

  • संगठनात्मक थकान: ठीक बड़े चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं की ऊर्जा और संसाधन पंचायत स्तर पर खर्च होने से मुख्य चुनाव की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं। 

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