अटारी-वाघा सीमा पर भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों की मौजूदगी में हुई पवित्र पालकी साहिब सौंपने की रस्म, श्रद्धालुओं में उत्साह
अमृतसर, 11 जून – (राजू वालिया) – सिख श्रद्धा, सेवा और गुरु घर के प्रति समर्पण की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए भारत से स्वर्ण जड़ित पालकी साहिब को पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा जनम अस्थान श्री ननकाना साहिब के लिए रवाना किया गया। यह पालकी साहिब प्रथम पातशाही गुरु नानक देव जी के पावन जन्म स्थान गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब में सुशोभित की जाएगी, जहां दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं।जानकारी के अनुसार पालकी साहिब को विशेष रूप से तैयार करवाया गया है, जिसमें पारंपरिक सिख कला, नक्काशी और स्वर्ण जड़ित सजावट का विशेष ध्यान रखा गया है। इस पवित्र पालकी साहिब को भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक सौहार्द और श्रद्धा के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। पालकी साहिब को अटारी-वाघा संयुक्त जांच चौकी (जेसीपी) के रास्ते पाकिस्तान भेजा गया, जहां भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सीमा शुल्क विभाग, विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों तथा पाकिस्तान रेंजर्स एवं गुरुद्वारा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों की मौजूदगी में इसे विधिवत सौंपा गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सेवादार और सिख संगत भी उपस्थित रही। धार्मिक प्रतिनिधियों ने कहा कि श्री ननकाना साहिब समूचे सिख जगत की आस्था का केंद्र है और वहां पालकी साहिब की स्थापना होना प्रत्येक श्रद्धालु के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक धार्मिक भेंट नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने का संदेश भी है। संगत ने अरदास कर पालकी साहिब को रवाना किया तथा गुरु नानक देव जी के उपदेशों—मानवता, भाईचारे और शांति—को विश्वभर में फैलाने का संकल्प दोहराया। श्रद्धालुओं ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी विश्वास और प्रेम बढ़ेगा।










