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यूपी बिजली विभाग में बड़ा टकराव! ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा और UPPCL चेयरमैन आमने-सामने, पत्र से मचा हड़कंप

लखनऊ | विशेष रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद सामने आया है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन आशीष गोयल के बीच मतभेद अब सार्वजनिक रूप से सामने आ गए हैं। ऊर्जा मंत्री द्वारा लिखे गए एक कड़े पत्र ने विभागीय कार्यप्रणाली और समन्वय को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मंत्री ने उठाए बड़े सवाल

सूत्रों के अनुसार ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने जून माह के बिजली बिलों में एफपीपीएएस (FPPAS) सरचार्ज बढ़ाए जाने और प्रदेश में बिजली आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर नाराजगी जताई है। मंत्री ने अपने पत्र में यह सवाल उठाया कि इतने महत्वपूर्ण निर्णय बिना उन्हें विश्वास में लिए कैसे लिए गए।

उन्होंने यह भी कहा कि विभाग के कई बड़े और नीतिगत फैसलों की जानकारी उन्हें सीधे अधिकारियों से नहीं, बल्कि समाचार माध्यमों के जरिए मिल रही है, जो प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।

बिजली संकट और कार्यशैली पर भी सवाल

ऊर्जा मंत्री ने प्रदेश में भीषण गर्मी के दौरान बिजली व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि महत्वपूर्ण परिस्थितियों के दौरान विभागीय शीर्ष स्तर पर समन्वय की कमी दिखाई दी।

मंत्री ने समीक्षा बैठकों में व्यक्तिगत उपस्थिति, प्रशासनिक जवाबदेही और विभागीय निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। संविदा कर्मचारियों से जुड़े कुछ निर्णयों पर भी उन्होंने नाराजगी व्यक्त की है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज

ऊर्जा मंत्री और UPPCL चेयरमैन के बीच सामने आए इस पत्राचार के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसे बिजली विभाग के भीतर समन्वय और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा जैसे संवेदनशील विभाग में शीर्ष स्तर पर बेहतर तालमेल आवश्यक होता है, क्योंकि इससे सीधे करोड़ों उपभोक्ताओं पर प्रभाव पड़ता है।

जनता पर क्या असर?

फिलहाल बिजली आपूर्ति व्यवस्था और बिलिंग प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी है। हालांकि विभाग के भीतर उभरे इस विवाद के बाद सभी की नजरें सरकार और उच्च प्रशासनिक स्तर पर होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

आगे क्या?

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस पूरे प्रकरण को किस तरह देखता है और विभागीय समन्वय तथा जवाबदेही को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर और भी महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। 

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