लखनऊ/आजमगढ़। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बयानबाज़ी तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजमगढ़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और प्रदेश सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी दोबारा सत्ता में आती है तो भविष्य में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
2027 चुनाव को लेकर बीजेपी पर बड़ा राजनीतिक हमला
अखिलेश यादव ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को डराना नहीं है, बल्कि यह उनका राजनीतिक आकलन है। उन्होंने कहा कि वह पहले भी कई बार इस आशंका को सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश की जनता अब बदलाव चाहती है और रोजगार, आरक्षण, महंगाई तथा विकास जैसे मुद्दों पर सरकार का मूल्यांकन कर रही है।
‘PDA सरकार’ के एजेंडे के साथ मैदान में सपा
सपा अध्यक्ष ने कहा कि समाजवादी पार्टी “पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक)” की अवधारणा को लेकर जनता के बीच जा रही है। उनका दावा है कि यही सामाजिक समीकरण प्रदेश में नई सरकार का आधार बनेगा और राज्य को सामाजिक न्याय व विकास की नई दिशा देगा।
राम मंदिर दान विवाद पर सरकार से पूछे सवाल
अखिलेश यादव ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़े कथित गबन के मामले को भी गंभीर बताते हुए सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, लेकिन अब तक जांच की रिपोर्ट और उसके आधार पर हुई कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि एसआईटी की रिपोर्ट आखिर किसे सौंपी गई और उस पर आगे क्या कदम उठाए गए।
डिंपल यादव ने भी SIT जांच पर जताया संदेह
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी इस मामले में एसआईटी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मामले की स्वतंत्र और व्यापक जांच कराई जानी चाहिए ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित अनियमितताएं हाल की नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही हो सकती हैं। उनके अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दान दिया था, इसलिए कथित गबन की वास्तविक राशि का अनुमान लगाना भी आसान नहीं है।
2027 चुनाव से पहले तेज हुई राजनीतिक जंग
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सभी प्रमुख दल चुनावी मुद्दों को धार देने में जुट गए हैं। एक ओर समाजवादी पार्टी सरकार पर रोजगार, आरक्षण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर हमलावर है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी विकास और संगठनात्मक मजबूती के साथ चुनावी तैयारियों को गति दे रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में प्रदेश की राजनीति और अधिक गर्म होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।










