इटावा (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से एक बेहद झकझोर देने वाला और इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जिले के बकेवर थाना क्षेत्र में एक 14 वर्षीय दिव्यांग (मूक-बधिर/विशेष आवश्यकता वाली) किशोरी के साथ दुष्कर्म के प्रयास की खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया है। घटना के बाद पीड़िता लहूलुहान हालत में मिली, जिसके बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
खेतों में शौच के लिए गई थी पीड़िता, 4 युवकों पर आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित किशोरी हमेशा की तरह घर के पास खेतों की ओर शौच के लिए गई थी। परिजनों का आरोप है कि वहां पहले से घात लगाकर बैठे चार युवकों ने किशोरी को दबोच लिया और उसके साथ दरिंदगी करने की कोशिश की।
काफी देर तक जब किशोरी घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। किशोरी खेतों में गंभीर रूप से घायल और लहूलुहान हालत में पाई गई। घटना की भनक लगते ही मौके पर भारी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय पुलिस एकत्रित हो गई। पीड़िता की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
एक्शन में पुलिस प्रशासन: एक आरोपी गिरफ्तार, कड़ी धाराएं लगेंगी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) और क्षेत्राधिकारी (CO) ने भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल का मुआयना किया। मौके से जुटाए गए साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर एक आरोपी को दबोच लिया है।
थाना प्रभारी का बयान: “फिलहाल पीड़िता के परिवार की ओर से छेड़छाड़ की तहरीर मिली है। लेकिन घटना की गंभीरता और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामले में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और दुष्कर्म के प्रयास जैसी सख्त व कड़ी धाराएं जोड़ी जाएंगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
पुलिस प्रशासन ने मामले की गहराई से तफ्तीश के लिए टीमें गठित कर दी हैं। घटनास्थल के आसपास के ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और संदिग्ध रास्तों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
फॉरेंसिक जांच और सुरक्षा का भरोसा
पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल जांच कराने के साथ ही सभी जरूरी सैंपल फॉरेंसिक लैब (FSL) जांच के लिए भेज दिए हैं, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में पुख्ता केस तैयार किया जा सके।
इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन ने पीड़ित परिवार को पूरी सुरक्षा मुहैया कराने का वादा किया है। प्रशासन की ओर से पीड़िता को कानूनी सहायता के साथ-साथ इस सदमे से उबारने के लिए मनोवैज्ञानिक मदद (Counseling) देने का भी आश्वासन दिया गया है।
बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
इस जघन्य वारदात के बाद से गांव के लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई है। इसके साथ ही, इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में ‘सार्वजनिक शौचालय’ जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में शौचालय की उचित व्यवस्था होती, तो मासूम बेटियों को इस तरह खुले में खेतों की तरफ नहीं जाना पड़ता और ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था।










