अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार मामला वर्ष 2023 में खरीदी गई एक भूमि को लेकर उठे सवालों का है। विपक्षी दलों का आरोप है कि ट्रस्ट ने लगभग 85 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई जमीन का उपयोग फिलहाल गौशाला के लिए हरे चारे की खेती में किया जा रहा है। वहीं इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में अयोध्या के शाहनवाजपुर मांझा क्षेत्र में राम मंदिर परिसर से करीब छह किलोमीटर दूर भूमि खरीदी गई थी। विपक्ष का दावा है कि इस भूमि पर अभी तक ट्रस्ट से जुड़ा कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है और वर्तमान में यहां हरे चारे की खेती की जा रही है।
विपक्ष ने उठाए कई सवाल
कांग्रेस नेता शरद शुक्ला के बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय सहित कई विपक्षी नेताओं ने जमीन की खरीद प्रक्रिया, भुगतान और वर्तमान उपयोग को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी सार्वजनिक महत्व की खरीद के उद्देश्य और उपयोग को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।
गौशाला के लिए चारा उगाने का दावा
स्थानीय स्तर पर यह दावा किया गया है कि संबंधित भूमि पर उगाया जा रहा हरा चारा कारसेवकपुरम स्थित श्रीराम गौशाला समिति में भेजा जाता है। समिति का संचालन अलग संस्था के रूप में होता है और इसके अध्यक्ष चंपत राय रहे हैं। हालांकि, इस दावे पर ट्रस्ट की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
खरीद मूल्य पर भी सवाल
विपक्ष का आरोप है कि भूमि बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर खरीदी गई। वहीं, जमीन बेचने वाले पक्ष का कहना है कि पूरी खरीद कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई और उन्हें निर्धारित भुगतान प्राप्त हुआ। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रस्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस विवाद पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। यदि ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया जाता है तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।









