पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज ( घुघली) पल्टू मिश्रा
1879 में राजा प्रह्लाद सेन ने रखी थी मंदिर की नींव, नर्मदा से लाए गए नर्मदेश्वर शिवलिंग की हुई थी प्राण-प्रतिष्ठा
रामनगर (पश्चिम चंपारण)। पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर में स्थित नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव मंदिर आस्था, इतिहास और भव्य स्थापत्य का अनूठा संगम है। करीब 147 वर्ष पुराने इस प्राचीन शिवधाम की नींव वर्ष 1879 में रामनगर राज के सेनवंशी राजा प्रह्लाद सिंह (प्रह्लाद सेन) ने रखी थी। समय बीतने के साथ यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
रानी के स्वप्न से जुड़ी है मंदिर की स्थापना की मान्यता
मंदिर की स्थापना को लेकर प्रचलित मान्यता बेहद रोचक है। कहा जाता है कि राजा प्रह्लाद सेन की रानी विंध्यवासिनी देवी को स्वप्न में भगवान शिव के दर्शन हुए थे। स्वप्न में मिले आदेश के बाद मध्य प्रदेश की पवित्र नर्मदा नदी से दुर्लभ नर्मदेश्वर शिवलिंग मंगवाया गया। वर्ष 1879 में इसी शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा कर मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू की गई।
श्रद्धालुओं के लिए नर्मदेश्वर महादेव का यह स्वरूप विशेष आस्था का केंद्र है। सावन, महाशिवरात्रि और सोमवार के अवसर पर यहां दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन करते हैं।
राज परिवार ने आगे बढ़ाया निर्माण कार्य
मंदिर निर्माण का कार्य बाद में भी जारी रहा। राजा प्रह्लाद सेन के निधन के बाद वर्ष 1886 में राज मनोहर विक्रम शाह ने मंदिर परिसर और चबूतरों के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया। राज परिवार के संरक्षण में मंदिर परिसर का विस्तार हुआ और इसकी भव्यता बढ़ती गई।
185 फीट ऊंचा मुख्य गुंबद खींचता है ध्यान
नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव मंदिर की वास्तुकला इसकी खास पहचान है। मंदिर का मुख्य गुंबद करीब 185 फीट ऊंचा बताया जाता है। वहीं चारों कोनों पर बने अन्य चार छोटे गुंबदों की ऊंचाई करीब 100-100 फीट है। विशाल गुंबदों और पारंपरिक स्थापत्य के कारण मंदिर दूर से ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है।
मुख्य गर्भगृह में नर्मदेश्वर महादेव विराजमान हैं। मंदिर परिसर के चार उप-मंदिरों में भगवान गणेश, माता दुर्गा, सूर्य देव और भगवान विष्णु की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इस तरह एक ही परिसर में भगवान शिव के साथ विभिन्न देवी-देवताओं की उपासना का अवसर श्रद्धालुओं को मिलता है।
इतिहास और आस्था का जीवंत प्रतीक
करीब डेढ़ शताब्दी से अधिक समय से यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र के इतिहास का भी साक्षी बना हुआ है। मंदिर की स्थापना से जुड़ी मान्यताएं, नर्मदा से लाए गए नर्मदेश्वर शिवलिंग और इसकी विशाल स्थापत्य शैली इसे रामनगर की विशिष्ट धार्मिक धरोहर बनाती है।
नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव का यह प्राचीन धाम आज भी श्रद्धालुओं के लिए शिवभक्ति और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां मंदिर की घंटियों और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठता है।










