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कलम को दलाली की मंडी बनने से रोकना होगा

कृष्णा पंडित की कलम से✍🏻

जुआरियों की पहुंच दूर तक,नहीं हो सकती कोई कानूनी कार्रवाई

पत्रकारिता खबर बेचने का कारोबार नहीं, सच सामने लाने का धर्म है। लेकिन जब कुछ लोग पत्रकारिता की पहचान को ढाल बनाकर जुए के अड्डों, अवैध कारोबार और अनैतिक धंधों के इर्द-गिर्द मंडराने लगें, तब सवाल उठना लाजिमी है— कलम खबर लिख रही है या कमाई का हिसाब कर रही है ?

जुआ समाज को बर्बाद करता है, परिवारों की जमा पूंजी निगलता है और अपराध की जमीन तैयार करता है। अनैतिक धंधे इसी अंधेरे को और गहरा करते हैं। ऐसे में पत्रकार का दायित्व है कि वह इन गतिविधियों को उजागर करे, न कि इनके आगे-पीछे घूमकर किसी तरह के निजी लाभ की उम्मीद लगाए।

दलाली और पत्रकारिता के बीच फर्क समझना होगा। पत्रकार की ताकत उसकी कलम है, किसी जुए के अड्डे की मेहरबानी नहीं। खबर रोकने, छापने या दबाने के नाम पर अगर कोई सौदेबाजी करता है तो वह पत्रकारिता की सेवा नहीं, उसकी प्रतिष्ठा पर चोट है।

जब कानून ही लाचार और बिचौलिए की भूमिका में हो तो जुआरी किसी की भी हत्या कर सकते हैं

आपने सही सुना बेरोजगार 10 हजार 20 हजार की भी नौकरी न पाने में असफल बेरोजगार मनबढ़, अपराधी आजकल जुए का संचालन के साथ प्रतिदिन लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं जिनके हिस्सेदार वर्दी से लेकर कलमकार तक हैं !
सबसे बड़ा सवाल उन लोगों से है जो समाज में कानून और नैतिकता की बातें करते हैं—अगर जुआ और अवैध धंधे गलत हैं तो उनकी खबर दबाने की कोशिश किसके हित में है? और अगर कोई इन धंधों से जुड़े लोगों के साथ उठता-बैठता है, तो क्या सिर्फ प्रेस कार्ड उसे सवालों से ऊपर कर देता है ?

काशी जैसे शहर में, जहां पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा रही है, कलम को दलाली की मंडी बनने से रोकना होगा। अपराधी अपराध करे तो कानून अपना काम करे, लेकिन पत्रकारिता के नाम पर कोई वसूली या दबाव की संस्कृति खड़ी करने की कोशिश करे तो समाज को भी सवाल पूछना चाहिए।

याद रखिए—जुए की मेज पर बैठे सिक्कों की खनक और पत्रकार की कलम की आवाज एक जैसी नहीं हो सकती।

पत्रकार खबर का पहरेदार है, किसी अवैध धंधे का हिस्सेदार नहीं!
दलालों का काम वसूली है—पत्रकारों का काम सच उजागर करना!

जब कभी भी खबर को लेकर प्रशासन दबाव महसूस करता है तो लाचार और कमजोर खिलाड़ी को दबोच कर खाना पूर्ति कर लेता है जबकि जितने भी बनारस में सिगरा, रोहनिया , कैंट, लंका, आदमपुर, चेतगंज अन्य कई इलाकों में जुए की खेती से रुपए का भंडारण जारी है और कानून व्यवस्था पर भारी है!! 

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