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वाराणसी में महिला की मौत के बाद 24 घंटे तक शव नहीं उठाने दिया, रास्ते के विवाद को लेकर परिजनों का हंगामा

वाराणसी। पिंडरा तहसील क्षेत्र के अहरक खास गांव में रास्ते के विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। यहां 50 वर्षीय कविता उपाध्याय की मौत के बाद परिजनों ने करीब 24 घंटे तक शव उठाने से इनकार कर दिया। परिवार का आरोप था कि पिछले करीब दो वर्षों से घर तक आने-जाने का रास्ता बंद होने के कारण कविता परेशान थीं और उन्होंने रास्ता खुलवाने के लिए अधिकारियों के कई चक्कर लगाए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

परिजनों का कहना है कि रास्ते के अभाव में परिवार को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। घर में होने वाले वैवाहिक कार्यक्रमों से लेकर रोजमर्रा के आवागमन तक में दिक्कत थी। परिवार का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन मिलता रहा।

मौत के बाद शव उठाने से किया इनकार

बुधवार शाम कविता की मौत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की तो परिजनों ने इसका विरोध किया।

परिजनों का कहना था कि जब उनके घर तक आने-जाने का उचित रास्ता ही नहीं है तो वे शव को अंतिम संस्कार के लिए कैसे ले जाएंगे। परिवार ने पहले रास्ते के विवाद का समाधान कराने की मांग रखी।

अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाया और मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद परिवार पोस्टमार्टम के लिए शव भेजने पर राजी हुआ।

बहू ने बताया दो साल से चल रहा था विवाद

कविता की बहू दीक्षा उपाध्याय ने आरोप लगाया कि रास्ते की समस्या को लेकर परिवार ने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से कई बार शिकायत की थी। उनका कहना है कि रास्ता बंद होने के कारण उन्हें गर्भावस्था के दौरान भी काफी परेशानी हुई और प्रसव के समय मायके जाना पड़ा।

दीक्षा के मुताबिक परिवार की तीन बेटियों और एक भतीजी की शादी भी घर से नहीं हो सकी। घर तक चार पहिया वाहन तो दूर, बाइक पहुंचने में भी परेशानी होती है। परिवार के लोग दूसरे स्थान पर वाहन खड़ा कर घर तक आते-जाते हैं।

परिवार का आरोप शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ समाधान

परिजनों का कहना है कि रास्ते के विवाद को लेकर कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई। उनका आरोप है कि अधिकारियों की ओर से मौके पर पहुंचकर समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।

परिजनों ने दावा किया कि कविता इस विवाद को लेकर काफी परेशान रहती थीं। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते रास्ते की समस्या का समाधान हो जाता तो शायद स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

22 जुलाई को भी की गई थी शिकायत

परिवार के अनुसार कविता ने 22 जुलाई 2026 को डीएम की जनसुनवाई में रास्ते को लेकर शिकायत की थी। परिजनों का दावा है कि 12 अगस्त को रिपोर्ट लगाकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया और रिपोर्ट में शिकायत को सही नहीं पाया गया।

परिवार का कहना है कि इसके बाद कविता और अधिक परेशान रहने लगी थीं।

क्या है पूरा जमीन विवाद

परिजनों के मुताबिक घर के बाहर करीब छह फीट चौड़ी सरकारी जमीन से उनका आवागमन होता था। आरोप है कि करीब दो वर्ष पहले आसपास के लोगों ने इस जमीन पर कब्जा कर दीवार खड़ी कर दी, जिसके बाद घर तक आने-जाने का रास्ता बेहद संकरा रह गया।

परिवार का कहना है कि वर्तमान में करीब दो फीट की गली से ही लोगों का आवागमन हो रहा है।

प्रशासन ने बताया मामला तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन

एसीपी पिंडरा प्रशांत सिंह के मुताबिक मामला परती भूमि से जुड़े विवाद का है और यह प्रकरण तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि परिवार तत्काल रास्ता उपलब्ध कराने की मांग कर रहा था, लेकिन भूमि भूमिधरी होने के कारण तत्काल रास्ता उपलब्ध कराना संभव नहीं था।

अधिकारियों ने परिजनों को समझाया, जिसके बाद शाम करीब सात बजे परिवार शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने को तैयार हुआ।

जांच के बाद स्पष्ट होगी आगे की स्थिति

महिला की मौत के बाद रास्ते के विवाद को लेकर परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। अब पूरे मामले में राजस्व अभिलेखों, भूमि की स्थिति और पूर्व में की गई शिकायतों की जांच महत्वपूर्ण होगी। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रास्ते को लेकर परिवार की शिकायतों पर पहले क्या कार्रवाई हुई थी और विवाद की वास्तविक स्थिति क्या थी।

 

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