रिहंद बांध परियोजना के साथ विकसित नगर में वर्षों से बसे परिवारों के भूमि-आवास के स्थायी समाधान की मांग, शासन स्तर पर उठाया गया मुद्दा
पूर्वांचल राज्य संवाददाता : दीपु तिवारी
सोनभद्र। रिहंद बांध परियोजना के साथ विकसित हुए पिपरी नगर में वर्षों से निवास कर रहे परिवारों के सामने संभावित बेदखली का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है। कई पीढ़ियों से पिपरी को अपना घर मानकर रह रहे परिवारों को बेदखली की आशंका से बचाने तथा उनके लिए भूमि एवं आवास की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग अब शासन स्तर तक पहुंच गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन के नगर अध्यक्ष अजीत कुमार गुप्ता ने लखनऊ स्थित शक्तिभवन में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक से मुलाकात कर पिपरी वासियों की समस्या को प्रमुखता से उठाया।
पिपरी के इतिहास से जुड़ी कई पीढ़ियों की जड़ें
मुलाकात के दौरान अजीत कुमार गुप्ता ने पिपरी के ऐतिहासिक विकास और यहां लंबे समय से निवास कर रहे परिवारों की स्थिति अधिकारियों के समक्ष रखी। उन्होंने बताया कि रिहंद बांध परियोजना की स्थापना के बाद क्षेत्र में विकास के उद्देश्य से आवासीय बस्ती एवं कॉलोनी का विस्तार हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार, देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा रिहंद बांध परियोजना का उद्घाटन किए जाने के बाद क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिली और पिपरी में लोगों के बसने का क्रम आगे बढ़ा। उन्होंने कहा कि पिपरी से कई परिवारों की केवल जमीन और मकान ही नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों की मेहनत, सामाजिक जीवन, रोजगार और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में यदि बेदखली की कार्रवाई होती है तो उसका असर केवल मकान और जमीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवारों के सामाजिक और आर्थिक जीवन के साथ उनकी भावनात्मक जड़ों पर भी पड़ेगा।
किसकी जमीन, किसे आवंटन? लीज की स्थिति स्पष्ट करने की मांग
वार्ता के दौरान परियोजना से जुड़ी भूमि के विभिन्न विभागों अथवा संस्थाओं को आवंटन और लीज से संबंधित स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी रखी गई। पिपरी वासियों की ओर से सवाल उठाया गया कि कौन-सी भूमि किस विभाग अथवा संस्था को, किस आधार पर और किन शर्तों के तहत उपलब्ध कराई गई, इसका स्पष्ट विवरण सामने आना चाहिए। अजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि भूमि की वास्तविक स्थिति, विभागवार आवंटन तथा लीज की शर्तें स्पष्ट होने से पूरे मामले की स्थिति सामने आएगी और लंबे समय से निवास कर रहे परिवारों के दावों एवं पात्रता का नियमानुसार परीक्षण किया जा सकेगा।
बेदखली के बजाय वैधानिक समाधान पर जोर
उन्होंने अधिकारियों के समक्ष प्रस्ताव रखा कि पात्र एवं लंबे समय से निवासरत परिवारों की स्थिति का विधिवत परीक्षण कर किराये, क्षतिपूर्ति, भूमि-भवन आवंटन अथवा लीज जैसे वैधानिक विकल्पों पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि विकास परियोजना के हितों और स्थानीय परिवारों के हितों के बीच संतुलन कायम करते हुए ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे पिपरीवासियों को अचानक विस्थापन की स्थिति का सामना न करना पड़े।
शक्तिभवन में स्थायी समाधान पर सकारात्मक चर्चा
बताया गया कि शक्तिभवन में हुई मुलाकात के दौरान पिपरीवासियों की समस्या के स्थायी, व्यावहारिक और मानवीय समाधान को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। अजीत कुमार गुप्ता ने उम्मीद जताई कि संबंधित स्तर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए पिपरीवासियों के हित में नियमानुसार उचित निर्णय की दिशा में पहल की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पिपरी केवल मकानों और जमीन का समूह नहीं है, बल्कि यहां रहने वाले परिवारों की कई पीढ़ियों की मेहनत, स्मृतियां और भावनाएं इससे जुड़ी हैं। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित परिवारों की स्थिति, भूमि अभिलेख, आवंटन की प्रक्रिया, लीज की शर्तों और लंबे समय से चले आ रहे निवास के तथ्यों का समुचित परीक्षण किया जाना आवश्यक है। पिपरी वासियों की बेदखली और भूमि-अधिकार से जुड़ा मुद्दा लंबे समय से स्थानीय चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में शक्तिभवन में हुई वार्ता को समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब क्षेत्रवासियों की नजर शासन एवं संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।










