बिना पंजीयन के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से निर्माण सामग्री की हो रही ढुलाई, पुलिस-परिवहन विभाग मौन
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, महराजगंज
महराजगंज जनपद के फरेन्दा क्षेत्र में नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों द्वारा सीमेंट, बालू, ईंट और सरिया जैसी निर्माण सामग्रियों की ढुलाई की जा रही है। इन वाहनों का उपयोग कृषि कार्यों के बजाय व्यावसायिक परिवहन में किया जा रहा है, जबकि इनमें से अधिकांश का व्यावसायिक पंजीयन व परमिट ही नहीं है।स्थानीय लोगों के अनुसार यह ढुलाई अक्सर बिना किसी ढक्कन या कवर के की जाती है, जिससे सड़क पर उड़ने वाली धूल और गिरने वाली सामग्री से राहगीरों को खतरा रहता है। इतना ही नहीं, अधिकतर ट्रॉलियों में रिफ्लेक्टर पट्टी भी नहीं लगी होती, जिससे रात के समय दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।न्यायालयों के निर्देश बेअसरइलाहाबाद हाई कोर्ट सहित विभिन्न न्यायालयों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना आवश्यक पंजीयन, परमिट और सुरक्षा मानकों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का व्यावसायिक उपयोग रोकना अनिवार्य है। इसके बावजूद फरेन्दा क्षेत्र में यह गैरकानूनी परिवहन बड़े पैमाने पर जारी है। नियमों के अनुसार बिना पंजीकृत व बिना परमिट वाले कृषि वाहनों से व्यावसायिक ढुलाई करना दंडनीय अपराध है, लेकिन इस पर न पुलिस और न ही परिवहन विभाग कोई ठोस कार्रवाई कर पा रहा है।जिम्मेदार विभागों की उदासीनतापिछले कई महीनों से क्षेत्र में पुलिस और परिवहन विभाग की टीमों द्वारा ऐसे वाहनों की जांच दिखावे के रूप में ही हो रही है। न तो स्थायी कार्रवाई और न ही नियमित चेकिंग की व्यवस्था है, जिसके चलते ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिक खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।थानाध्यक्ष प्रशान्त कुमार ने बताया कि, “जांच के दौरान यदि बिना पंजीयन और बिना परमिट के ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी जाती है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी”। हालांकि, फिलहाल ऐसी किसी कार्रवाई की मिसाल जनता को देखने को नहीं मिली है।सड़क सुरक्षा को गंभीर खतराबिना ढके और बिना सुरक्षा उपकरणों वाली ट्रॉलियों से ढुलाई के कारण सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ रही है। निर्माण सामग्री के खुले परिवहन से मोटर चालकों एवं पैदल यात्रियों को रोजाना खतरा झेलना पड़ रहा है।स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पुलिस, परिवहन विभाग और प्रशासन संयुक्त रूप से अभियान चलाकर इन गैरकानूनी ट्रैक्टर-ट्रॉली परिवहन पर तुरंत अंकुश लगाए, ताकि न्यायालय के आदेशों का पालन हो और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।










