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वाराणसी! खाकी और रसूख के गठजोड़ ने ली न्याय की बलि!दिवंगत अधिवक्ता के परिवार पर ‘फर्जी मुकदमों’ का प्रहार

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, वाराणसी।

प्रधानमंत्री मोदी जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के “मिर्जामुराद” थाना क्षेत्र के बहेड़वा हाल्ट गाँव में आज एक शिक्षित अधिवक्ता परिवार सिसकियों और सिस्टम की बेरहमी का गवाह बन रहा है। यह कहानी है एक दिवंगत वरिष्ठ अधिवक्ता के परिवार की, जिन्हें अपराधी और पुलिस मिलकर ‘अपराधी’ बनाने पर तुले हैं।

26 साल पुराना जख्म और आज की साजिश !

करीब 26 साल पहले अपराधियों ने एक वरिष्ठ अधिवक्ता की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उस परिवार ने दुख झेलकर अपने चार बेटों को काबिल बनाया—आज उनमें से दो अधिवक्ता हैं और दो पत्रकार। लेकिन विडंबना देखिए, जिस परिवार को न्याय और सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, आज वही परिवार जेल से छूटे हत्यारों और रसूखदारों के निशाने पर है।

कैसे बुना जा रहा है ‘फर्जी मुकदमों’ का जाल!

आरोप है कि अपराधियों ने इस शिक्षित परिवार को बर्बाद करने के लिए एक सोची-समझी रणनीति अपनाई है:
हथियार के रूप में कानून का दुरुपयोग: कथित तौर पर गिरोह से जुड़ी एक महिला का इस्तेमाल कर परिवार के पुरुषों पर SC/ST एक्ट और छेड़खानी जैसे गंभीर लेकिन फर्जी मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं।
बिना जांच की कार्रवाई: डीसीपी गोमती जोन, आकाश पटेल पर आरोप लग रहे हैं कि उनके आदेश पर बिना किसी निष्पक्ष जांच के, दबाव में आकर पुलिस तुरंत मुकदमे दर्ज कर रही है।
22 फरवरी की घटना: जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में दिखे
ताजा विवाद 22 फरवरी 2026 का है। एक बार फिर बिना ठोस तथ्यों के मिर्जामुराद थाने में पीड़ित अधिवक्ता और पत्रकार भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पीड़ित पवन कुमार मिश्रा (पत्रकार) का कहना है कि प्रशासन उन्हें आत्मसम्मान से जीने नहीं दे रहा है और अपराधियों को खुला संरक्षण मिल रहा है।

प्रमुख सवाल जो प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हैं!

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह स्पष्ट है कि यदि रसूखदारों के दबाव में पुलिस की नैतिकता खत्म हो जाएगी और कानून व लोकतंत्र की सेवा करने वाले शिक्षित परिवारों को ही बार-बार FIR के जरिए निशाना बनाया जाएगा, तो यह निष्पक्ष न्याय प्रणाली के बजाय एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है।

निष्कर्ष: लोकतंत्र के स्तंभों पर प्रहार !

यह केवल एक जमीन या रंजिश का मामला नहीं है। यह न्याय के प्रहरी (वकील) और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (पत्रकार) को कुचलने की कोशिश है। वाराणसी जैसे हाई-प्रोफाइल क्षेत्र में अगर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे पुलिस के साथ मिलकर एक प्रतिष्ठित परिवार को प्रताड़ित कर रहे हैं, तो यह उत्तर प्रदेश की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर एक बड़ा धब्बा है।
शासन और उच्चाधिकारियों को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, वरना एक शिक्षित परिवार रसूख की भेंट चढ़ जाएगा।

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