पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज / घुघली
महराजगंज, स्वतंत्रता संग्राम की तपती भट्ठी में तपकर निकले जननायक शिब्बन लाल सक्सेना का नाम आज भी महराजगंज की मिट्टी में सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि जनपद की राजनीतिक चेतना के प्रखर स्तंभ और किसानों-मजदूरों की आवाज थे।
आज़ादी की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के योद्धा
शिब्बन लाल सक्सेना ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने जेल यात्राएं कीं और कई बार अंग्रेजी शासन का दमन झेला। उनके भाषणों में जनजागरण की ऐसी शक्ति थी कि नौजवानों में स्वतंत्रता की लौ और तेज हो जाती थी।
महराजगंज की राजनीतिक पहचान के निर्माता
स्वतंत्रता के बाद उन्होंने महराजगंज क्षेत्र के विकास को अपना लक्ष्य बनाया। वे संसद तक पहुंचे और क्षेत्र की समस्याओं—सड़क, सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य—को राष्ट्रीय मंच पर उठाया। कहा जाता है कि महराजगंज को अलग जनपद के रूप में पहचान दिलाने की सोच और आवाज़ को मजबूत करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
शिक्षा और सामाजिक चेतना के प्रहरी
शिब्बन लाल सक्सेना शिक्षा को समाज परिवर्तन का आधार मानते थे। उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थापना व विस्तार में सहयोग दिया। ग्रामीण अंचलों में शिक्षा की अलख जगाकर उन्होंने नई पीढ़ी को जागरूक और आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया।
सादगी और संघर्ष का प्रतीक
वे सादगीपूर्ण जीवन और ऊँचे आदर्शों के लिए जाने जाते थे। आमजन से सीधा संवाद, समस्याओं को सुनना और समाधान के लिए संघर्ष करना उनकी कार्यशैली की पहचान थी।
आज जब महराजगंज विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, तब शिब्बन लाल सक्सेना की विरासत प्रेरणा बनकर सामने आती है। उनका जीवन संदेश देता है कि जनसेवा, त्याग और संघर्ष ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।
महराजगंज की धरती ऐसे सपूत पर आज भी गर्व करती है।
जननायक की गूंज: शिब्बन लाल सक्सेना का महराजगंज में स्वर्णिम इतिहास









