वाराणसी में बकरीद पर दिखी गंगा-जमुनी तहजीब की अनोखी मिसाल, सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें
रिपोर्ट: स्पेशल डेस्क
वाराणसी में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार इस बार सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनकर सामने आया।
काशी की गलियों में एक ओर मस्जिदों से अजान की आवाज गूंज रही थी, तो दूसरी ओर मंदिरों में बजते शंख, घंट और घड़ियाल माहौल को आध्यात्मिक रंग दे रहे थे। इसी अनोखे संगम के बीच मुस्लिम समुदाय ने शांतिपूर्ण तरीके से बकरीद की नमाज अदा की।
त्योहार की तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनकी लोग जमकर सराहना कर रहे हैं।
सुबह से शुरू हुई नमाज, मस्जिदों में उमड़ी भारी भीड़
भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन और मस्जिद कमेटियों ने सुबह जल्दी नमाज कराने का निर्णय लिया था। शहर की कई प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह 6:30 बजे से नमाज शुरू हो गई थी।
नदेसर, लंगड़ा हाफिज मस्जिद (नई सड़क), लोहता और आसपास के कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने पहुंचे। भीड़ अधिक होने के कारण कई मस्जिदों में दो शिफ्टों में नमाज का आयोजन किया गया।
नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर बकरीद की मुबारकबाद दी और देश में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे की दुआ मांगी।
सुरक्षा व्यवस्था रही हाई अलर्ट पर
त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया।
संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई थी। इसके अलावा ड्रोन कैमरों से भीड़ और गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई।
प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार निगरानी करते हुए यह सुनिश्चित किया कि किसी भी तरह की अफवाह या अव्यवस्था की स्थिति पैदा न हो।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ “काशी मॉडल”
बकरीद के दौरान मंदिरों की घंटियों और मस्जिदों की अजान का एक साथ सुनाई देना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों को लोग “काशी मॉडल ऑफ हार्मनी” बता रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता और साझा विरासत की खूबसूरत तस्वीर कहा।
लोगों का कहना है कि काशी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन दिलों में भाईचारा और सम्मान सबसे ऊपर है।
गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत तस्वीर
वाराणसी सदियों से अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के लिए पहचानी जाती रही है। यहां त्योहार सिर्फ एक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे शहर की साझी परंपरा का हिस्सा बन जाते हैं।
इस बार भी बकरीद के मौके पर वही तस्वीर देखने को मिली, जहां श्रद्धा, आस्था और भाईचारे ने मिलकर एक सकारात्मक संदेश दिया।
सबसे बड़ा संदेश
जब देश के कई हिस्सों में धार्मिक तनाव और सोशल मीडिया पर नफरत की बहसें देखने को मिलती हैं, ऐसे समय में काशी की यह तस्वीर उम्मीद और एकता का संदेश देती है।
शंखनाद और अजान के बीच गूंजती भाईचारे की यह आवाज सिर्फ वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बन गई है।










