भदोही। माहे रमज़ान की रहमतों और बरकतों के बीच शहर में उस वक्त जज़्बाती और रूहानी माहौल बन गया, जब वरिष्ठ पत्रकार आफताब अंसारी के साहबज़ादे मौलाना हाफिज अरफात हुसैन ने अज़ीमुल्लाह चौराहे वाली मस्जिद में नमाज़-ए-तरावीह मुकम्मल की।**
माहे रमज़ान के 9वें रोज़े और तरावीह की 10वीं शब को जैसे ही तरावीह मुकम्मल हुई, मस्जिद में मौजूद अकीदतमंदों ने खुशी और फख्र का इज़हार किया। नमाज़ के बाद दुआओं का सिलसिला चला और माहौल में रूहानियत की खास लहर महसूस की गई।
गले लगाकर दी दुआएं, फूल-मालाओं से हुआ इस्तकबाल
तरावीह मुकम्मल होने पर पिता आफताब अंसारी ने अपने बेटे हाफिज अरफात हुसैन को गले लगाकर दुआओं से नवाज़ा। यह पल बेहद जज़्बाती रहा, जिसे देख मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
वहीं, मस्जिद में मौजूद लोगों ने हाफिज साहब को फूल-मालाएं पहनाकर मुबारकबाद पेश की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इल्म-ए-दीन की राह पर बढ़ता क़दम
शहर के बुजुर्गों और नौजवानों ने इस कामयाबी को पूरे समाज के लिए फख्र का मौका बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी का दीन की तरफ रुझान समाज के लिए खुशआइंद पैगाम है।
रमज़ान के पाक महीने में कुरआन की तिलावत और तरावीह की मुकम्मल अदायगी को बड़ी सआदत माना जाता है। हाफिज अरफात हुसैन की इस कामयाबी से इलाके में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें लगातार मुबारकबाद दे रहे हैं।
भदोही में रूहानी फिज़ा: हाफिज अरफात हुसैन ने अज़ीमुल्लाह चौराहे वाली मस्जिद में मुकम्मल की नमाज़-ए-तरावीह










