Allahabad High Court ने संभल की एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के जिला प्रशासन के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि प्रशासन किसी मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों की संख्या तय नहीं कर सकता। साथ ही राज्य सरकार को नमाज के समय पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
यह फैसला न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति नमाज में बाधा डालने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
याचिका पर सुनाया गया फैसला
यह मामला Sambhal निवासी मुनाजिर खान की याचिका पर सुनवाई के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि रमजान के दौरान मस्जिद में नमाज पढ़ने आने वाले लोगों की संख्या पर प्रशासन ने रोक लगा दी थी।
याचिका के अनुसार, पिछले साल फरवरी में Hayatnagar Police Station क्षेत्र से पुलिसकर्मी मस्जिद पहुंचे और कहा कि एक समय में केवल 20 लोग ही नमाज अदा कर सकते हैं, जबकि एक बार में 5–6 लोगों को ही मस्जिद में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
कोर्ट ने पहले भी लगाई थी फटकार
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर जिला प्रशासन कानून व्यवस्था संभालने में सक्षम नहीं है तो अधिकारियों को पद छोड़ देना चाहिए या अपना तबादला करा लेना चाहिए।
प्रशासन का तर्क खारिज
सरकारी पक्ष ने अदालत में दलील दी थी कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और प्रशासन के आदेश को निरस्त कर दिया।
मस्जिद और जमीन का विवाद
प्रशासन के अनुसार, हयातनगर गांव में स्थित घोसिया मस्जिद करीब 450 वर्गफीट क्षेत्र में बनी है। रिकॉर्ड के मुताबिक यह जमीन गाटा नंबर 291 में दर्ज है और दस्तावेजों में इसका मालिकाना हक मोहन सिंह और भूराज सिंह पुत्र सुखी सिंह के नाम पर दर्ज बताया गया है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब मस्जिद में नमाज अदा करने पर लगी संख्या संबंधी पाबंदी समाप्त हो गई है। साथ ही प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।










