विशेषज्ञों ने बताया—आतंकवाद के खिलाफ भारत की सशक्त पहल
पूर्वांचल राज्य/रुद्र पाठक
चन्दौली। सकलडीहा स्थित पीजी कॉलेज में मंगलवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इस संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के रक्षा एवं स्ट्रैटेजिक अध्ययन विभाग तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसे भारतीय वैश्विक परिषद का सहयोग प्राप्त था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विद्वानों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आयोजित यह संगोष्ठी अत्यंत प्रासंगिक है और यह भारत की उत्कृष्ट सैन्य क्षमता का अप्रतिम उदाहरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी देश विशेष के खिलाफ युद्ध नहीं, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत सरकार की सफल रणनीतिक कार्रवाई थी।
विशिष्ट वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं रक्षा मामलों के विशेषज्ञ प्रो. हरिशरण ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे भारत सरकार का दूरदर्शी और देशहित में लिया गया निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने कायराना हमलों का मुंहतोड़ जवाब देकर देश की सैन्य ताकत को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है और यह अभियान भारत की रक्षा एवं विदेश नीति में नया प्रतिमान स्थापित करता है।
मुख्य अतिथि के रूप में मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ समय की मांग थी और इसने देशवासियों में भावनात्मक एकता को और मजबूत किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अभियान अभी पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ है और भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर दृढ़ता से कायम है।
आईसीएडब्ल्यूए (भारत सरकार) के डी.जे. भट्टाचार्य ने ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियां छात्रों को देश के गौरवशाली इतिहास और सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराती हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में इस स्तर की राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. विजेंद्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया।
कार्यक्रम के दौरान उस समय की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया, जब आतंकी हमले के बाद पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल था तथा जनता कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही थी। वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने जनभावनाओं के अनुरूप निर्णायक कदम उठाया।
संगोष्ठी का संचालन डॉ. पवन कुमार ओझा ने किया। इस अवसर पर प्रो. दयानिधि यादव, प्रो. शमीम राइन, प्रो. इंद्रदेव सिंह, प्रो. उदयशंकर झा, प्रो. महेंद्र प्रताप, डॉ. राजेश यादव, डॉ. अजय यादव, डॉ. इंद्रजीत सिंह, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. यज्ञनाथ पाण्डेय, डॉ. जितेंद्र यादव, डॉ. वंदना, डॉ. अमन, डॉ. रजनीश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के दौरान देशभर से आए शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जिनमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के विभिन्न रणनीतिक, राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शोधार्थियों को राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य नीति और आतंकवाद विरोधी रणनीतियों के प्रति जागरूक करना रहा।










