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19 वें वर्ष भी लोकरंग के मंच पर जोगिया जनूबी पट्टी में गूंजेगी विभिन्न राज्यों के कलाकारों की लोक संस्कृति

लोकरंग-2026’ का 11-12 अप्रैल को होगा भव्य आयोजन

लोकरंग केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं लोक-संस्कृति को बचाने का सतत अभियान है- सुभाष चन्द्र कुशवाहा अध्यक्ष लोसां समिति

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो कुशीनगर
लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन के उद्देश्य से लोकरंग सांस्कृतिक समिति द्वारा 11 व 12 अप्रैल 2026 को जोगिया जनूबी पट्टी में दो दिवसीय ‘लोकरंग-2026’ उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन अपने 19वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और इसे लोकसंस्कृति के मर्मज्ञ स्व. तैयब हुसैन की स्मृति को समर्पित किया गया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ 11 अप्रैल की रात 8:30 बजे होगा, जिसमें ‘लोकरंग-2026’ स्मारिका का लोकार्पण भी किया जाएगा। पहली रात में ग्राम्य महिलाओं द्वारा रोपनी-सोहनी गीत, दुर्गेश उपाध्याय का भोजपुरी गायन, ललितपुर के कलाकारों द्वारा बुंदेली सैरा व राई नृत्य तथा रायगढ़ की टीम द्वारा सुआ, करमा, ददरिया व पंथी लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा त्रिपुरा की खुम्पुई कल्चरल अकादमी ‘होजागिरि’ नृत्य की प्रस्तुति देगी। कार्यक्रम का समापन ‘उल्लू पंचायत’ नाटक के साथ होगा।
दूसरे दिन 12 अप्रैल को ‘लोकसंस्कृति के नायक बनाम वंचितों की संघर्ष गाथा’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें प्रो. सुभाष चंद्र सैनी और प्रो. दिनेश कुशवाह सहित कई विद्वान भाग लेंगे। शाम को प्रेरणा कला मंच, वाराणसी द्वारा जनगीत, थारू रीदम कला संस्थान द्वारा जंतसारी व झमटा, त्रिपुरा के कलाकारों द्वारा लेबांग बोमानी व ममिता नृत्य तथा अफ्फान कव्वाल द्वारा सूफी कव्वाली प्रस्तुत की जाएगी। कार्यक्रम का समापन मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘मंदिर-मस्जिद’ पर आधारित नाटक ‘अमानत’ से होगा।
लोकरंग सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र कुशवाहा ने कहा कि “लोकरंग केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति को बचाने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सतत अभियान है। आज के दौर में जब बाजारवाद और फूहड़ता का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे में लोकरंग जैसी पहल समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती है।”
उन्होंने बताया कि इस आयोजन को सफल बनाने में समिति के कई सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है, जिनमें विष्णुदेव राय, हदीश अंसारी, भुनेश्वर राय, इसराइल अंसारी, नितांत कुमार सिंह, सिकंदर गोंड और अनुभव राय सहित अन्य कार्यकर्ता सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। समिति के अनुसार, यह आयोजन बाजारवाद और सांस्कृतिक विकृति के खिलाफ जनसंस्कृति को मजबूत करने का प्रयास है।
आयोजन स्थल को कला पोस्टरों और भित्ति चित्रों से सजाया जा रहा है। समिति ने क्षेत्र के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। 

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