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श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ एवं सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार की कलश यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम् तथा समस्त धर्मप्रेमियों के सौजन्य से आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ एवं सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार की भव्य कलश शोभा यात्रा शनिवार को अत्यंत श्रद्धा एवं उत्साह के साथ निकली। गंगापुर (हुकुमछपरा) गंगा घाट से हाथ में कलश लिए श्रद्धालुओं की लम्बी कतार देखते ही बन रही थी। ‘एक ही नारा एक ही नाम-जय श्रीराम जय श्रीराम’, हर-हर महादेव व गंगा मईया की जयकारा से पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आ रहा था। गंगा घाट से पचरूखिया, रामपुर-दीघार बाजार होते हुए शोभा यात्रा रामगढ़, गंगापुर के रास्ते पुनः यज्ञस्थल पर पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन के बाद श्रद्धालुओं ने कलश में गंगा जल भरकर यज्ञमंडप में स्थापित किया।आचार्य पं. मोहित पाठक जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रतिदिन सम्पन्न होने वाले यज्ञीय कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री ने कहा कि, यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवन पद्धति है। यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है। मन पवित्र होता है। समाज में सद्भाव, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यज्ञ मानव, प्रकृति और परमात्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने का माध्यम है। यज्ञोपवीत संस्कार द्वारा बालकों को वैदिक शिक्षा, अनुशासन एवं धर्ममय जीवन की दिशा प्राप्त होती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर यज्ञ में आहुति देने एवं धर्म लाभ प्राप्त करने का आह्वान किया।

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