पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी
वाराणसी धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के संवर्धन हेतु श्री सेनापति बनकटी हनुमान मंदिर, दुर्गाकुंड के पावन प्रांगण में विश्वकल्याण की भावना से प्रेरित होकर सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का भव्य आयोजन 2 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक सुनिश्चित किया गया है। इस आयोजन के संबंध में मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित गिरीश कुमार मिश्रा जी द्वारा एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर विस्तृत जानकारी साझा की गई।
पत्रकार वार्ता के दौरान पंडित गिरीश कुमार मिश्रा ने बताया कि यह कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों की स्थापना और मानव जीवन के कल्याण हेतु एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है तथा उसे धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करता है।
इस पावन अवसर पर कथा वाचन हेतु पूज्य आचार्य आशुतोष महाराज को कथा व्यास के रूप में आमंत्रित किया गया है, जिनकी मधुर वाणी और गहन ज्ञान से भक्तगण आध्यात्मिक अमृत का रसास्वादन करेंगे। कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति के महत्व एवं जीवन के गूढ़ रहस्यों का सरल एवं प्रभावशाली वर्णन किया जाएगा।*कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है
कथा प्रारंभ 2 अप्रैल 2026 (गुरुवार)कथा विश्राम: 8 अप्रैल 2026 (बुधवार)
कथा समय: प्रतिदिन सायं 4:30 बजे से 7:30 बजे तक
समापन दिवस 8 अप्रैल 2026 को सायं 7:30 बजे से विशाल भंडारा एवं महाप्रसाद का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। यह भंडारा “प्रभु इच्छा तक” चलता रहेगा, जिसमें सभी भक्तों का सादर स्वागत है।
पंडित मिश्रा ने सभी धर्मप्रेमी नागरिकों, श्रद्धालुओं एवं काशीवासियों से आग्रह किया कि वे इस दिव्य आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण करें और अपने जीवन को धन्य बनाएं। उन्होंने कहा कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में इस प्रकार के आध्यात्मिक आयोजनों से मन को शांति, आत्मा को संतोष और जीवन को सही दिशा प्राप्त होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि आयोजन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। मंदिर प्रांगण को भव्य रूप से सजाया जा रहा है तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समुचित व्यवस्था की गई है। कथा स्थल पर बैठने, जलपान एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है ताकि आने वाले सभी श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की एकअसुविधा न हो।
इस अवसर पर मंदिर परिवार के अन्य सदस्यों ने भी अपनी सहभागिता सुनिश्चित करते हुए आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया। सभी ने मिलकर यह आह्वान किया कि यह कथा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बने।










