दुद्धी (सोनभद्र) के म्योरपुर वन क्षेत्र अंतर्गत कटौन्धी गांव स्थित जंगल में रेलवे ट्रैक के पास हजारों हरे पेड़ों की अवैध कटाई का गंभीर मामला सामने आया है। करीब पांच बीघा भूमि पर हुए इस बड़े पैमाने के कटान ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, सागवान, खैर (कत्था) और सिद्धा जैसे कीमती पेड़ों को बड़े पैमाने पर काटा गया है। कटाई के बाद लकड़ियों को सिल्ली बनाकर मौके पर ही जमा किया गया, लेकिन उन पर किसी प्रकार का आधिकारिक छपान (मार्किंग) नहीं है, जिससे कटान की वैधता संदिग्ध हो गई है।
बताया जा रहा है कि संबंधित भूमि पड़ोसी राज्य झारखंड के पलामू निवासी बैजनाथ (फौजी) या उनके किसी करीबी के नाम पर खरीदी गई है। आरोप है कि मोटर और इलेक्ट्रॉनिक मशीनों की मदद से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई, लेकिन वन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
मौके पर मौजूद एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर दावा किया कि कटाई के लिए वन विभाग के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों को करीब ढाई लाख रुपये एडवांस दिए गए। हालांकि, इस दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कि सामान्यतः 17 से अधिक हरे पेड़ों की कटाई पर रोक होती है और वन विभाग जंगलों की सुरक्षा के लिए कई उपाय करता है। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर कटान होना विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रेणुकूट वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी कमल कुमार ने बताया कि 17 से अधिक पेड़ों की कटाई की कोई अनुमति नहीं दी गई है। यदि इससे अधिक पेड़ काटे गए हैं, तो जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और अवैध रूप से काटी गई लकड़ियों को जब्त कर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
यह घटना न केवल पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि वन संरक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़े सवाल खड़े करती है।










