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रेणु नदी में अवैध खनन का खेल जारी, एनजीटी के नियमों की उड़ रही धज्जियां

पूर्वांचल राज्य संवाददाता दीपू तिवारी

सोनभद्र: ओबरा तहसील क्षेत्र में रेणु नदी से अवैध बालू खनन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। खेवंधा बालू साइट की आड़ में प्रतिबंधित मशीनों के जरिए नदी के गर्भ से धड़ल्ले से बालू निकाली जा रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में मूकदर्शक बने हुए हैं।

जानकारी के अनुसार, रेणु नदी में एसके बायो फर्म के नाम से अराजी संख्या 246 पर बालू खनन के लिए पट्टा आवंटित है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि पट्टा धारक के इशारे पर नियमों को दरकिनार कर मशीनों से अवैध खनन कराया जा रहा है। रात के अंधेरे से लेकर दिनदहाड़े तक नदी का सीना चीरकर बालू निकाली जा रही है।

गौरतलब है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा नदियों में मशीनों के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है, इसके बावजूद खनन माफिया खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि नदी का स्वरूप बिगड़ने और जलस्तर गिरने का खतरा भी बढ़ गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध खनन के चलते सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। वहीं, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटो और वीडियो के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस खुलेआम चल रहे अवैध कारोबार पर अंकुश क्यों नहीं लगाया जा रहा है।

क्या यह प्रशासन की अनदेखी है या फिर संरक्षण में यह खेल चल रहा है—यह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है 

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