पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में शुक्रवार को जननायक चन्द्रशेखर जन्मशताब्दी महोत्सव का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर जननायक चन्द्रशेखर का व्यक्तित्व एवं कृतित्व विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि/ वक्ता वीरेंद्र सिंह मस्त, पूर्व सांसद लोकसभा ने कहा कि चन्द्रशेखर एक राष्ट्रभक्त भारतपुत्र का नाम है। चन्द्रशेखर भारतीय राजनीति के पुरोधा थे। समाजवादी आंदोलन के अगुआ होने के कारण उनका गाँव, गरीब और किसान से हमेशा जुड़ाव रहा, इसीलिए वे स्वदेशी एवं ग्राम आधारित अर्थव्यवस्था के पक्षधर थे। विशिष्ट अतिथि स्वदेशी जागरण मंच के अजय ने कहा कि चन्द्रशेखर का व्यक्तित्व गाँव और गरीबी ने गढ़ा इसीलिए ये दोनों हमेशा उनके चिंतन में केंद्र-बिंदु बने रहे। चन्द्रशेखर ने अपनी भारत यात्रा में पूरे भारत के जनमानस से संवाद स्थापित किया था और इसी आधार पर अपने राजनीतिक मूल्यों को तराशा था। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि चन्द्रशेखर ने जनसरोकार से जुड़ी राजनीति की। उनके राजनीतिक सिद्धांत अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति से निर्धारित हुए। विश्वविद्यालय उनके मूल्यों और आदर्शों को विद्यार्थियों के माध्यम से समाज में आगे बढ़ाने का कार्य करेगा। इस अवसर पर जननायक चन्द्रशेखर के जीवन एवं व्यक्तित्व पर आधारित विवरणिका एवं जन्म शताब्दी प्रतीक चिह्न (लोगो) का भी लोकार्पण किया गया। विषय प्रवर्तन करते हुए प्रो. अशोक कुमार सिंह ने चंद्रशेखर के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की और जन्मशताब्दी वर्ष के विविध आयोजनों की प्रस्तावित रूपरेखा भी प्रस्तुत की। कार्यक्रम का आयोजन चन्द्रशेखर नीति अध्ययन केंद्र एवं शोधपीठ के तत्वाधान में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ वाणी वंदना, वन्देमातरम एवं कुलगीत गायन के साथ हुआ, जिसकी प्रस्तुति संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने की। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन डॉ. प्रमोद शंकर पाण्डेय, संचालन डॉ सरिता पाण्डेय एवं धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव एस. एल. पाल ने किया। कार्यक्रम का संयोजन चंद्रशेखर नीति अध्ययन केन्द्र एवं शोधपीठ के सहायक निदेशक डॉ. प्रवीण नाथ यादव ने किया। इस अवसर पर वित्त अधिकारी आनंद दुबे, डॉ. पुष्पा मिश्रा, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. अजय चौबे, डॉ. विनीत सिंह, डॉ. मनोज कुमार आदि परिसर एवं म
जेएनसीयू में जननायक चन्द्रशेखर जन्म शताब्दी महोत्सव का शुभारंभ










